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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : तेलंगाना में क्रूरता का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है । पिछले कुछ दिनों में, कामारेड्डी जिले के माछेरेड्डी मंडल के फरीदपेट , भवानीपेट , वाडी और पलावांचा गांवों में लगभग 500 से 600 आवारा कुत्तों को जहर देकर मार डाला गया है । आरोप है कि यह सामूहिक हत्या इन गांवों के नव निर्वाचित सरपंचों द्वारा आयोजित की गई थी । गौतम स्ट्रे एनिमल्स फाउंडेशन की शिकायत के बाद , पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

यह घटना माछेरेड्डी मंडल के विभिन्न गांवों में अचानक मृत कुत्तों के शव मिलने से शुरू हुई। स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार , हाल ही में चुने गए सरपंचों ने ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और चुनाव के दौरान उनके कथित आतंक को रोकने के लिए यह " शॉर्टकट " अपनाया था । बताया जा रहा है कि इन मूक जानवरों को उनके भोजन में जहर मिलाकर या जहरीले इंजेक्शन देकर बेरहमी से मार डाला गया और फिर सबूत मिटाने के लिए उनके शवों को चुपके से ठिकाने लगा दिया गया ।

आवारा कुत्तों के प्रति सर्वोच्च न्यायालय की क्या प्रतिक्रिया थी?

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों की समस्या पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उसने कुत्तों को मारने का आदेश नहीं दिया है, बल्कि पशु जन्म नियंत्रण अधिनियम के अनुसार उनके प्रबंधन का आदेश दिया है। हालांकि, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत इस तरह से कुत्तों को मारना न केवल अनैतिक है, बल्कि दंडनीय अपराध भी है। प्रारंभिक जांच के आधार पर , कामारेड्डी पुलिस ने संबंधित सरपंच और उसके सहयोगियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता ( आईपीसी) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

मामला कैसे सामने आया

यह भयावह घटना तब सामने आई जब पशु अधिकार कार्यकर्ताओं और स्ट्रे एनिमल्स फाउंडेशन इंडिया ( SAFI) के प्रतिनिधियों को इसकी जानकारी मिली । फाउंडेशन के अधिकारी , अदुलपुरम गौतम, घटनास्थल पर पहुंचे , सबूत जुटाए और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई । उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचित प्रतिनिधियों ने कानून की अनदेखी की और आपराधिक कृत्य किया ।

यह घटना ऐसे समय में घटी है जब तेलंगाना के कई हिस्सों में आवारा कुत्तों के साथ दुर्व्यवहार की खबरें सामने आ रही हैं । हालांकि, विशेषज्ञों का मानना ​​है कि नसबंदी और टीकाकरण जैसे सरकारी उपायों को लागू करने के बजाय सामूहिक हत्याओं का विकल्प चुनना प्रशासन और स्थानीय नेतृत्व की विफलता को दर्शाता है ।