शेयर बाजार में फ्रॉड, व्हाट्सऐप ग्रुप्स के जरिए फर्जीवाड़ा करने वालों पर ED का शिकंजा

शेयर बाजार में फ्रॉड, व्हाट्सऐप ग्रुप्स के जरिए फर्जीवाड़ा करने वालों पर ED का शिकंजा

देश के शेयर बाजार में निवेश के नाम पर आम लोगों को ठगने वाले बड़े साइबर सिंडिकेट और फर्जी ट्रेडिंग रैकेट के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब तक की सबसे बड़ी और सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। फर्जी व्हाट्सऐप ग्रुप्स, टेलीग्राम चैनल्स और नकली ट्रेडिंग ऐप्स के जरिए हजारों निवेशकों से करोड़ों रुपये ठगने वाले जालसाजों के खिलाफ ईडी की टीमों ने एक साथ देश के 6 प्रमुख शहरों में 29 से अधिक ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है। इस राष्ट्रव्यापी कार्रवाई से शेयर बाजार में फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोहों और उनके आकाओं में जबर्दस्त हड़कंप मच गया है। जांच एजेंसियों को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए लोगों को शेयर ट्रेडिंग में रातों-रात तीन से चार गुना रिटर्न का लालच देकर उनके जीवनभर की कमाई लूटी जा रही थी।

ईडी की कई टीमों का एक साथ एक्शन, 6 बड़े शहरों में 29 परिसरों पर सुबह-सुबह छापा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय की दर्जनों अलग-अलग टीमों ने स्थानीय पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ मिलकर मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, अहमदाबाद, जयपुर, कोलकाता और बेंगलुरु जैसे प्रमुख आर्थिक हब वाले 6 बड़े शहरों में एक साथ रेड मारी। जांच एजेंसी के अधिकारियों ने तड़के ही इन जालसाजों, फर्जी ब्रोकिंग फर्मों, और शैल कंपनियों के दफ्तरों व उनके प्रमोटरों के रिहायशी परिसरों को घेर लिया। शुरुआती तलाशी के दौरान ईडी को भारी मात्रा में डिजिटल सबूत, कई बैंक खातों के दस्तावेज, फर्जी पहचान पत्रों पर जारी सिम कार्ड, लैपटॉप और कई लग्जरी गाड़ियों के कागजात मिले हैं। इसके अलावा वित्तीय धांधली में इस्तेमाल किए जाने वाले दर्जनों बेनामी बैंक अकाउंट्स का भी पता चला है, जिनमें संदिग्ध लेनदेन किए गए थे।

व्हाट्सऐप और टेलीग्राम ग्रुप्स से ऐसे बिछाया जाता था जाल, गारंटीड रिटर्न का देते थे लालच

इस पूरे अंतर्राष्ट्रीय स्तर के साइबर और फाइनेंशियल फ्रॉड का मोडस ऑपरेंडी (काम करने का तरीका) बेहद शातिराना था। यह गिरोह सबसे पहले सोशल मीडिया विज्ञापन, व्हाट्सऐप और टेलीग्राम ग्रुप्स के माध्यम से लोगों से संपर्क साधता था। इन ग्रुप्स में खुद को सेबी (SEBI) से रजिस्टर्ड नामचीन वित्तीय विशेषज्ञ और शेयर बाजार के दिग्गज विश्लेषक बताकर फर्जी स्क्रीनशॉट और नकली मुनाफे के आंकड़े पोस्ट किए जाते थे। जब आम निवेशक इनके बुने जाल में फंस जाता था, तो उसे एक फर्जी मोबाइल ऐप या वेबसाइट डाउनलोड कराई जाती थी जो देखने में बिल्कुल असली शेयर ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म जैसी लगती थी। इसके बाद पीड़ितों से कई किश्तों में लाखों रुपये जमा करवा लिए जाते थे और जब निवेशक अपना पैसा वापस निकालने की कोशिश करते थे, तो उनसे टैक्स या प्रोसेसिंग फीस के नाम पर और पैसों की मांग की जाती थी तथा अंत में उन्हें ग्रुप्स से ब्लॉक कर दिया जाता था।

हवाला नेटवर्क और शेल कंपनियों के जरिए विदेशी खातों में भेजी जाती थी ठगी की रकम

ईडी की प्राथमिक जांच में इस बात का बड़ा खुलासा हुआ है कि भारत भर के मासूम निवेशकों से ठगी गई यह अकूत धनराशि फर्जी शैल (Shell) कंपनियों और अवैध हवाला नेटवर्क के माध्यम से विदेशों में ट्रांसफर की जा रही थी। इस काले धन को व्हाइट मनी में बदलने के लिए दर्जनों डमी बैंक अकाउंट्स का इस्तेमाल किया गया, जिन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में गरीब लोगों के नाम पर खुलवाया गया था। इसके साथ ही इस रकम का बड़ा हिस्सा क्रिप्टो करेंसी (Cryptocurrency) के रूप में बदलकर विदेशी वॉलेट्स में भेजा गया ताकि भारतीय जांच एजेंसियों से बचा जा सके। ईडी अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस पूरे सिंडिकेट का कनेक्शन सीमा पार बैठे चीनी या अन्य अंतर्राष्ट्रीय साइबर अपराध गिरोहों से जुड़ा हुआ है।

सेबी और पुलिस की चेतावनियों के बावजूद बढ़ रहे थे मामले, ईडी की कार्रवाई से निवेशकों को जगी उम्मीद

शेयर बाजार नियामक सेबी (SEBI) और गृह मंत्रालय की साइबर क्राइम विंग समय-समय पर सोशल मीडिया ग्रुप्स और अनधिकृत ट्रेडिंग ऐप्स से बचने की एडवाइजरी जारी करते रहते हैं। इसके बावजूद रोजाना सैकड़ों लोग इस तरह के ऑनलाइन स्टॉक मार्केट फ्रॉड का शिकार बन रहे थे। वित्तीय मामलों के जानकारों का मानना है कि ईडी द्वारा की गई इस ऐतिहासिक छापेमारी और संपत्ति जब्ती की कार्रवाई से न केवल ऐसे फर्जी सिंडिकेट्स की कमर टूटेगी, बल्कि जालसाजी में फंसे निवेशकों के पैसे की रिकवरी का रास्ता भी साफ हो सकेगा। प्रवर्तन निदेशालय ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे कभी भी किसी अनधिकृत व्हाट्सऐप या टेलीग्राम ग्रुप के बहकावे में आकर अपनी गाढ़ी कमाई निवेश न करें और हमेशा सेबी रजिस्टर्ड ब्रोकर्स के जरिए ही ट्रेडिंग करें।