जम्मू-कश्मीर में मुफ्त LPG सिलेंडर पर विधानसभा में बवाल: किसे मिलेंगे साल में 6 सिलेंडर और क्यों भड़का विपक्ष?
जम्मू-कश्मीर की नवनिर्वाचित विधानसभा का सत्र शुरू होते ही एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। सदन के भीतर उस समय जबरदस्त हंगामा और तीखी नोकझोक देखने को मिली जब सरकार द्वारा प्रदेश के पात्र परिवारों को साल में 6 रसोई गैस (LPG) सिलेंडर मुफ्त देने की बहुप्रतीक्षित योजना पर चर्चा शुरू हुई। चुनाव के दौरान किए गए वादों के तहत लाई गई इस लोकलुभावन योजना पर जहां सत्ता पक्ष इसे जनता के लिए एक बड़ी राहत बता रहा है, वहीं विपक्षी दलों ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए सरकार को घेर लिया है। विधानसभा के अंदर सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच तीखी बहस के कारण सदन की कार्यवाही तक बाधित हो गई, जिससे यह मुद्दा पूरे केंद्र शासित प्रदेश में मुख्य चर्चा का विषय बन गया है।
सरकार की नई एलपीजी योजना के क्या हैं प्रावधान? जानिए किसे मिलेंगे साल में 6 मुफ्त सिलेंडर
जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा सदन में पेश किए गए प्रस्ताव के अनुसार, इस कल्याणकारी योजना का मुख्य उद्देश्य समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, विशेषकर अंत्योदय और गरीब परिवारों को महंगे रसोई गैस सिलेंडरों के बोझ से राहत दिलाना है। तय दिशानिर्देशों के मुताबिक, इस योजना का लाभ उन परिवारों को मिलेगा जो पहले से ही उज्ज्वला योजना या राज्य की लक्षित खाद्य सुरक्षा योजनाओं के दायरे में आते हैं। इन पात्र लाभार्थियों को साल भर में कुल 6 एलपीजी सिलेंडर मुफ्त या सब्सिडी के रूप में दिए जाएंगे, ताकि वे स्वच्छ ईंधन का उपयोग कर सकें। सरकार का दावा है कि इस पहल से गरीब महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार होगा और उन्हें धुएं से मुक्ति मिलेगी, लेकिन इसके क्रियान्वयन और पात्रता के पैमानों को लेकर विपक्ष ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विपक्ष के हंगामे की असली वजह: क्या हैं वो तीखे सवाल जिन पर सदन में हुआ भारी बवाल?
जैसे ही सरकार ने मुफ्त एलपीजी सिलेंडर योजना की रूपरेखा सदन के पटल पर रखी, विपक्षी दलों के विधायकों ने अपनी सीटों पर खड़े होकर इसका विरोध करना शुरू कर दिया। विपक्ष का मुख्य आरोप यह है कि सरकार इस योजना के नाम पर जनता के साथ छलावा कर रही है क्योंकि इसके लिए जो शर्तें और पात्रता नियम तय किए गए हैं, उनसे अधिकांश जरूरतमंद परिवार बाहर हो जाएंगे। विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार को बिना किसी भेदभाव के प्रदेश के हर गरीब परिवार को इस योजना का लाभ देना चाहिए, न कि चुनिंदा श्रेणियों तक इसे सीमित रखना चाहिए। इसके अलावा, योजना के लिए वित्तीय आवंटन (Financial Allocation) और सब्सिडी के पैसे सीधे खातों में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को लेकर भी विपक्ष ने पारदर्शिता पर बड़े सवाल उठाए हैं।
सत्ता पक्ष का पलटवार: विपक्ष पर लगाया जनविरोधी होने और राजनीति करने का आरोप
विपक्ष के तीखे हमलों का जवाब देते हुए सत्ता पक्ष के मंत्रियों और विधायकों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विपक्ष अपनी राजनीतिक जमीन खो चुका है और वे जनता के हित में उठाए जाने वाले हर बड़े कदम का सिर्फ विरोध करने के लिए विरोध कर रहे हैं। सरकार की ओर से यह सफाई दी गई कि वित्तीय संसाधनों को ध्यान में रखते हुए यह योजना पूरी तरह पारदर्शी तरीके से डिजाइन की गई है ताकि वास्तव में जो लोग इसके हकदार हैं, उन तक इसका पूरा लाभ पहुंच सके। सत्ता पक्ष ने यह भी याद दिलाया कि यह उनके चुनावी घोषणापत्र का एक अहम हिस्सा था जिसे सरकार बनते ही लागू करने की दिशा में तेजी से काम शुरू कर दिया गया है। भारी हंगामे और नारेबाजी के बीच सदन के अध्यक्ष को स्थिति संभालने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
आम जनता और उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया, क्या वाकई मिलेगा इस योजना का पूरा फायदा?
विधानसभा में भले ही इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच घमासान मचा हुआ हो, लेकिन आम जनता और गृहिणियों के बीच इस घोषणा को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। महंगाई के इस दौर में साल भर में 6 मुफ्त सिलेंडर मिलने की बात आम आदमी के लिए एक बड़ी राहत जरूर है, बशर्ते इसका लाभ बिना किसी लाल फीताशाही और भ्रष्टाचार के सीधे लाभार्थियों तक पहुंचे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की सामाजिक कल्याण योजनाएं सरकार की राजनीतिक स्थिरता और लोकप्रियता तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार विपक्ष के तीखे तेवरों और आपत्तियों के बीच इस योजना को कितनी सफलता के साथ धरातल पर उतार पाती है।