भारत ने सेमीकंडक्टर सेक्टर में झोंके 70,000 करोड़ रुपये, जानिए देश का मेगा प्लान
वैश्विक तकनीकी बाजार में आज यदि किसी एक सबसे बड़े और रणनीतिक मोर्चे पर महासंग्राम छिड़ा हुआ है, तो वह सेमीकंडक्टर चिप निर्माण का उद्योग है, जिस पर लंबे समय से चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई दिग्गजों का एकछत्र साम्राज्य रहा है। लेकिन अब भारत ने इस गेम-चेंजिंग सेक्टर में अपनी मजबूत और निर्णायक दस्तक देते हुए सत्तर हजार करोड़ रुपये का भारी-भरकम दांव खेल दिया है, जिसने दुनिया भर के तकनीकी विशेषज्ञों और ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग दिग्गजों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश को आत्मनिर्भर बनाने और ग्लोबल सप्लाई चेन का सिरमौर बनाने के लिए उठाए गए इस कदम से यह साफ हो गया है कि नया भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता बनकर नहीं रहना चाहता, बल्कि वह चिप मेकिंग के क्षेत्र में दुनिया के बड़े-बड़े दिग्गजों को कड़ी टक्कर देने के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुका है। इस महत्वाकांक्षी योजना के धरातल पर उतरने से न केवल देश के भीतर बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल समेत कई अन्य उद्योगों की आयात पर निर्भरता भी हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी।
सेमीकंडक्टर चिप्स की वैश्विक जंग और एशियाई दिग्गजों के वर्चस्व को चुनौती देता भारत
आधुनिक दुनिया के किसी भी स्मार्ट डिवाइस, स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), मिसाइल सिस्टम या सुपरकंप्यूटर की धड़कन यदि कुछ है, तो वह सिलिकॉन से बनने वाली यह छोटी सी सेमीकंडक्टर चिप ही होती है। पिछले कुछ वर्षों में कोरोना महामारी और भू-राजनीतिक तनावों के कारण जब वैश्विक स्तर पर चिप्स की सप्लाई चेन बाधित हुई थी, तब दुनिया को यह अहसास हुआ था कि इस तकनीक पर नियंत्रण रखने वाले देश ही भविष्य की अर्थव्यवस्था की दिशा तय करेंगे। ताइवान, दक्षिण कोरिया, चीन और जापान जैसे देश इस क्षेत्र में दशकों से अपनी बादशाहत कायम रखे हुए थे और उनके पास अरबों डॉलर का बुनियादी ढांचा मौजूद था। ऐसे में भारत सरकार द्वारा उठाया गया यह सत्तर हजार करोड़ रुपये का ऐतिहासिक कदम सीधे तौर पर इन पारंपरिक दिग्गजों की बादशाहत को खुली चुनौती दे रहा है। देश के विभिन्न राज्यों में स्थापित होने वाले अत्याधुनिक फैब (FAB) और असेंबली प्लांट्स यह साबित कर रहे हैं कि भारत अब ग्लोबल सेमीकंडक्टर मैप पर अपनी एक स्थाई और मजबूत जगह बनाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
गुजरात, असम और अन्य राज्यों में स्थापित हो रहे मेगा प्रोजेक्ट्स और सरकार की ऐतिहासिक प्रोत्साहन योजनाएं
भारत को सेमीकंडक्टर का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए केंद्र सरकार की 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' (ISM) योजना के तहत देश के अलग-अलग हिस्सों में युद्ध स्तर पर काम शुरू किया जा चुका है। गुजरात के धोलेरा से लेकर असम के मोरीगांव तक बड़े पैमाने पर चिप मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और आउटसोर्स सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट (OSAT) फैसिलिटी स्थापित की जा रही हैं, जिन पर दुनिया की दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनियों ने भी भारी निवेश करने में गहरी रुचि दिखाई है। सरकार द्वारा निवेशकों को भारी-भरकम वित्तीय प्रोत्साहन (Incentives), टैक्स छूट और विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराया जा रहा है ताकि भारत में चिप निर्माण की लागत को वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके। स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकारें इन मेगा प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने के लिए हर संभव प्रशासनिक सहयोग प्रदान कर रही हैं, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि भारत जल्द से जल्द चिप उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भरता का मुकाम हासिल कर सके।
तकनीकी शिक्षा, रिसर्च और स्किल्ड मैनपावर के जरिए भविष्य की चुनौतियों से निपटने की पुख्ता तैयारी
किसी भी हाई-टेक और अत्याधुनिक उद्योग की सफलता के पीछे केवल पैसों का निवेश ही नहीं, बल्कि सबसे बड़ा हाथ उच्च कोटि के इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और स्किल्ड मैनपावर का होता है। भारत सरकार इस बात को बहुत अच्छी तरह समझती है कि सेमीकंडक्टर डिजाइन और फैब्रिकेशन के क्षेत्र में चीन और ताइवान जैसी महारत हासिल करने के लिए देश के भीतर ही एक मजबूत टैलेंट पूल तैयार करना होगा। इसके लिए देश के प्रमुख आईआईटी (IITs) और तकनीकी संस्थानों में विशेष पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं, जहां हजारों युवाओं को वीएलएसआई (VLSI) डिजाइन और चिप मैन्युफैक्चरिंग की विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है। भारत का यह बहुआयामी दृष्टिकोण यह सुनिश्चित कर रहा है कि हमारे पास न केवल अत्याधुनिक मशीनें और कारखाने हों, बल्कि उन्हें चलाने और नए नवाचार करने के लिए दुनिया का सबसे बेहतरीन और प्रशिक्षित दिमाग भी उपलब्ध हो।
आत्मनिर्भर भारत का नया संकल्प और वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की बढ़ती सामरिक धमक
चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों को सेमीकंडक्टर के मोर्चे पर मात देने की भारत की यह महत्वाकांक्षा सिर्फ एक आर्थिक लक्ष्य नहीं है, बल्कि यह देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और तकनीकी संप्रभुता से जुड़ा हुआ एक बहुत बड़ा कदम है। जब देश के भीतर ही चिप्स का निर्माण शुरू हो जाएगा, तो हमें अपनी रक्षा प्रणालियों, ऑटोमोबाइल सेक्टर और टेलीकॉम नेटवर्क के लिए किसी अन्य देश के आगे हाथ फैलाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। दुनिया के तमाम विकसित देश अब भारत को एक भरोसेमंद और सुरक्षित सप्लाई चेन पार्टनर के रूप में देख रहे हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि अस्थिर होती वैश्विक राजनीति के बीच भारत ही वह देश है जो स्थिरता और विकास का नया पैमाना गढ़ रहा है। आने वाले कुछ ही वर्षों में जब 'मेड इन इंडिया' चिप्स पूरी दुनिया के गैजेट्स और वाहनों की रफ्तार तय करेंगी, तो यह इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण होगा कि भारत ने न सिर्फ चीन और कोरिया को पछाड़ दिया है, बल्कि ग्लोबल टेक इंडस्ट्री का नया लीडर बनकर उभरा है।