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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के नेताओं ने दिल्ली स्थित आरएसएस मुख्यालय में आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबले से मुलाकात की। यह मुलाकात लगभग आधे घंटे तक चली। आरएसएस सूत्रों के अनुसार, यह मात्र एक शिष्टाचार भेंट थी। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं ने मुलाकात की इच्छा व्यक्त की थी, जिसके कारण यह बैठक हुई।

इससे पहले, सोमवार (12 जनवरी, 2026) को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मुख्यालय का दौरा किया। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सीपीसी के अंतर्राष्ट्रीय विभाग की उप मंत्री सुन हैयान ने किया।

आरएसएस मुख्यालय में हुई बैठक का महत्व: 
आरएसएस को भारतीय राजनीति और समाज का एक वैचारिक स्तंभ माना जाता है। हालांकि यह प्रत्यक्ष रूप से एक राजनीतिक दल नहीं है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर इसका वैचारिक प्रभाव स्पष्ट है। परिणामस्वरूप, सीसीपी प्रतिनिधियों का आरएसएस मुख्यालय का दौरा एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है। आरएसएस सूत्रों का कहना है कि यह बैठक सीसीपी नेताओं के अनुरोध पर हुई थी और मात्र एक औपचारिकता थी, लेकिन कूटनीति में औपचारिकता भी एक संदेश देती है। इससे संकेत मिलता है कि चीन भारत को न केवल सरकारी या राजनयिक चैनलों के माध्यम से, बल्कि वैचारिक और सामाजिक स्तर पर भी समझने का प्रयास कर रहा है।

विजय चौथाईवाले ने 
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि भाजपा के विदेश मामलों के प्रभारी विजय चौथाईवाले ने कहा कि भाजपा महासचिव अरुण सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने बैठक में भाग लिया। बैठक का मुख्य विषय भाजपा और सीपीसी के बीच अंतर-दलीय संवाद को और मजबूत करने के तरीके थे। बातचीत से संकेत मिलता है कि दोनों देश अब न केवल सरकारी स्तर पर बल्कि राजनीतिक दल स्तर पर भी संवाद को संस्थागत रूप देने का प्रयास कर रहे हैं।