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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार तड़के मुंबई में अंबानी और रिलायंस पावर से जुड़े 12 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर कॉर्पोरेट जगत में खलबली मचा दी है। यह कार्रवाई ₹40,000 करोड़ के बैंक लोन और मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़ी बताई जा रही है। जांच एजेंसी की इस आक्रामक कार्रवाई ने अंबानी साम्राज्य पर दबाव और बढ़ा दिया है।

रिलायंस पावर के दफ्तरों और ठिकानों पर ED की दबिश

शुक्रवार सुबह शुरू हुई इस कार्रवाई में ED की अलग-अलग टीमों ने रिलायंस पावर लिमिटेड और उससे जुड़ी सहयोगी कंपनियों के पंजीकृत कार्यालयों और आवासीय परिसरों को निशाने पर लिया। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी को कुछ संदिग्ध ट्रांजेक्शन और बड़े फंड ट्रांसफर के इनपुट मिले थे। हालांकि, ED ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रेस रिलीज जारी नहीं की है, लेकिन माना जा रहा है कि छापेमारी का मुख्य उद्देश्य डिजिटल साक्ष्य और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को कब्जे में लेना है।

क्या है ₹40,000 करोड़ का पूरा विवाद?

इस पूरी जांच की जड़ें रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) द्वारा भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और यस बैंक (Yes Bank) सहित कई बड़े वित्तीय संस्थानों से लिए गए भारी-भरकम कर्ज में छिपी हैं। आरोप है कि बैंकों से लिए गए इस पैसे का नियमों को ताक पर रखकर अन्य संस्थाओं और विदेशी बैंक खातों में डायवर्ट किया गया। इस मामले के तार चीनी सरकारी बैंकों से भी जुड़े हैं, जिनका करीब ₹13,558 करोड़ का बकाया दांव पर लगा है। यह पूरी जांच साल 2019 में सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद गठित एसआईटी (SIT) की देखरेख में चल रही है।

फरवरी में जब्त हुआ था ₹3,500 करोड़ का आलीशान बंगला 'अबोड'

जांच एजेंसियों का यह शिकंजा अचानक नहीं कसा है। पिछले महीने, फरवरी 2026 में ED ने अनिल अंबानी को अब तक का सबसे बड़ा झटका देते हुए मुंबई स्थित उनके आलीशान निवास "अबोड" (Abode) को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया था। इस बंगले की बाजार में कीमत लगभग ₹3,500 करोड़ आंकी गई है। इस हालिया कार्रवाई के साथ ही अब तक अंबानी समूह की जब्त की गई कुल संपत्तियों का मूल्य ₹15,700 करोड़ के पार पहुंच गया है।

कॉर्पोरेट जगत में मची हलचल, आगे क्या?

ED की इस कार्रवाई ने रिलायंस पावर के शेयरों और बाजार में कंपनी की साख पर भी गहरा असर डाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मनी लॉन्ड्रिंग के पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो आने वाले दिनों में अनिल अंबानी की व्यक्तिगत मुश्किलें और गिरफ्तारियों तक की नौबत आ सकती है। फिलहाल, सभी की निगाहें जांच एजेंसी के अगले कदम और रिलायंस समूह की ओर से आने वाली आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।