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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात ने मंगलवार को एक बड़ा ऐतिहासिक कदम उठाते हुए समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक 2026 को विधानसभा में बहुमत से पारित कर दिया है। उत्तराखंड के बाद गुजरात देश का ऐसा दूसरा राज्य बन गया है, जहां अब सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक और संपत्ति के उत्तराधिकार जैसे मामलों में एक समान कानून लागू होगा। सदन में चर्चा के दौरान विपक्षी दल कांग्रेस ने बिल को चयन समिति (Select Committee) के पास भेजने की मांग की थी, जिसे खारिज किए जाने के बाद कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।

मुख्यमंत्री का भावुक संबोधन: 'बेटियों की रक्षा के लिए उठाना पड़ा कानून का डंडा'

विधेयक पारित होने के बाद मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल काफी भावुक नजर आए। सदन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "प्रदेश की जनता मुझे प्यार से 'दादा' बुलाती है। एक दादा होने के नाते मेरा यह नैतिक दायित्व है कि मैं अपनी बेटियों, बहनों और माताओं की रक्षा करूं। उनकी सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए अगर मुझे कानून का डंडा भी उठाना पड़ा, तो मैं पीछे नहीं हटूंगा।" मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कानून किसी की धार्मिक स्वतंत्रता छीनने के लिए नहीं, बल्कि समाज में व्याप्त कानूनी भेदभाव को जड़ से मिटाने के लिए लाया गया है।

संपत्ति में 100% अधिकार और 'हलाला' जैसी प्रथाओं पर लगेगी रोक

इस नए कानून के लागू होने से गुजरात में महिलाओं के अधिकारों को एक नई मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने सदन में बताया कि अब तक पर्सनल लॉ के चलते कई समुदायों में बेटियों को भाइयों के मुकाबले संपत्ति में आधा हिस्सा ही मिलता था, लेकिन अब गुजरात की हर बेटी को पिता की संपत्ति में बेटे के बराबर यानी पूरे 100 प्रतिशत अधिकार प्राप्त होंगे। इसके साथ ही, महिलाओं के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने वाली 'निकाह हलाला' जैसी कुप्रथाओं पर भी इस कानून के जरिए हमेशा के लिए पूर्णविराम लग जाएगा।

लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य, श्रद्धा वालकर जैसे कांडों पर लगेगी लगाम

बदलते दौर की चुनौतियों को देखते हुए गुजरात सरकार ने इस बिल में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर बेहद सख्त प्रावधान किए हैं। मुख्यमंत्री पटेल ने श्रद्धा वालकर हत्याकांड जैसी भयावह घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अब अनिवार्य होगा। यह कदम युवाओं को कानून के दायरे में लाने और सुरक्षा प्रदान करने के लिए उठाया गया है, न कि इसे बढ़ावा देने के लिए। साथ ही, शादी का पंजीकरण (Marriage Registration) भी अनिवार्य कर दिया गया है ताकि पहचान छिपाकर या धोखाधड़ी से निकाह करने वालों पर नकेल कसी जा सके।

आदिवासी समाज को दायरे से बाहर रखा, परंपराओं का सम्मान बरकरार

विधेयक की बारीकियों पर चर्चा करते हुए सरकार ने साफ किया कि गुजरात के आदिवासी समुदायों की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और उनके रीति-रिवाजों का पूरा सम्मान किया गया है। आदिवासियों को इस कानून के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है, ताकि उनकी परंपराएं पहले की तरह सुरक्षित रहें। वहीं, अल्पसंख्यकों के बीच चचेरी बहनों से विवाह जैसी परंपराओं पर स्पष्ट किया गया कि यदि वह उनके समुदाय की मान्य परंपरा है, तो उसे अवैध नहीं माना जाएगा। इस विधेयक के पारित होने को गुजरात के इतिहास में एक 'स्वर्ण युग' की शुरुआत माना जा रहा है।