Prabhat Vaibhav,Digital Desk : भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में उत्तराखंड हाई कोर्ट ने एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए पारदर्शिता और जवाबदेही की नई इबारत लिखी है। सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत अधीनस्थ न्यायालयों के जजों और न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ मिली शिकायतों की जानकारी साझा करने वाला उत्तराखंड हाई कोर्ट देश का पहला हाई कोर्ट बन गया है।
हाई कोर्ट द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में राज्य के जजों के खिलाफ भ्रष्टाचार और अन्य अनियमितताओं की कुल 258 शिकायतें दर्ज की गई हैं।
RTI से खुली फाइलों की परतें: 5 साल का डेटा आया सामने
उत्तराखंड हाई कोर्ट के सतर्कता सेल (Vigilance Cell) ने खुलासा किया है कि 1 जनवरी 2020 से 15 अप्रैल 2025 के बीच राज्य के अधीनस्थ न्यायालयों के अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों का तांता लगा रहा।
कुल शिकायतें: 258
कड़ी कार्रवाई: इन शिकायतों के आधार पर 4 न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है।
इन बड़े राज्यों ने किया था इनकार, उत्तराखंड ने दिखाया रास्ता
सूचना के अधिकार के तहत जजों के खिलाफ भ्रष्टाचार की जानकारी देना हमेशा से एक विवादास्पद मुद्दा रहा है। इससे पहले छत्तीसगढ़, मद्रास और दिल्ली हाई कोर्ट ने ऐसी ही जानकारियां देने से साफ इनकार कर दिया था। उनका तर्क था कि यह सूचनाएं 'संवेदनशील और गोपनीय' होती हैं। हालांकि, उत्तराखंड हाई कोर्ट ने राज्य सूचना आयोग के आदेश के बाद यह जानकारी सार्वजनिक कर एक मिसाल कायम की है।
कैसे शुरू हुआ यह मामला?
यह पूरा घटनाक्रम मुख्य वन संरक्षक (अनुसंधान) हल्द्वानी संजीव चतुर्वेदी द्वारा दायर की गई एक RTI याचिका से शुरू हुआ। उन्होंने जजों पर लागू होने वाले नियमों, शिकायतों की संख्या और उन पर हुई कार्रवाई के दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां मांगी थीं।
शुरुआती इनकार: हाई कोर्ट के लोक सूचना अधिकारी ने पहले यह जानकारी देने से मना कर दिया था, जिसे बाद में राज्य सूचना आयोग में चुनौती दी गई।
आयोग का फैसला: राज्य सूचना आयोग ने स्पष्ट किया कि "केवल यह कहना कि सूचना गोपनीय है, जानकारी न देने का आधार नहीं हो सकता।" आयोग ने आदेश दिया कि जजों की व्यक्तिगत पहचान उजागर किए बिना शिकायतों की संख्या और प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक हित में साझा की जाए।
न्याय प्रणाली में जवाबदेही का नया युग
अधिवक्ता सुदर्शन गोयल के अनुसार, "यह कदम न्याय के प्रशासन में पारदर्शिता लाने के लिए मील का पत्थर साबित होगा।" जजों के खिलाफ शिकायतों के आंकड़े सार्वजनिक होने से जनता का न्यायपालिका पर विश्वास मजबूत होगा और अधिकारियों में जवाबदेही का डर बना रहेगा। जॉइंट रजिस्ट्रार एचएस जीना ने 11 फरवरी को यह ऐतिहासिक जानकारी अपीलकर्ता को उपलब्ध कराई।




