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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : सुनने की क्षमता में कमी यानी 'हियरिंग लॉस' कोई ऐसी समस्या नहीं है जो रातों-रात पैदा हो जाए। यह एक धीमी प्रक्रिया है जो धीरे-धीरे हमारे कानों पर असर डालती है। अक्सर लोग इसे बढ़ती उम्र का तकाजा मानकर छोड़ देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शुरुआती लक्षणों को समय रहते पहचान लिया जाए, तो भविष्य में होने वाली गंभीर बहरेपन की समस्या से बचा जा सकता है। आइए जानते हैं श्रवण हानि के उन 5 प्रमुख संकेतों के बारे में जिन्हें आपको भूलकर भी इग्नोर नहीं करना चाहिए।

1. शब्दों का स्पष्ट सुनाई न देना (मंबलिंग)

क्या आपको अक्सर ऐसा महसूस होता है कि सामने वाला व्यक्ति बुदबुदा रहा है या बहुत धीरे बोल रहा है? यदि आपको बातचीत के दौरान शब्दों की स्पष्टता समझने में दिक्कत हो रही है, तो यह श्रवण हानि का प्राथमिक लक्षण है। विशेष रूप से "स", "फ", "का" और "थ" जैसे व्यंजनों (Consonants) की ध्वनियों को पकड़ना मुश्किल हो जाता है।

2. टीवी या रेडियो की आवाज बहुत तेज रखना

अगर आपके घर के सदस्य अक्सर यह शिकायत करते हैं कि आप टीवी या मोबाइल की आवाज बहुत ज्यादा तेज रखते हैं, तो सावधान हो जाइए। जब हमें सामान्य आवाज सुनाई देना कम हो जाती है, तो हमारा मस्तिष्क खुद को संतुलित करने के लिए तेज आवाज की मांग करता है। यह एक स्पष्ट संकेत है कि आपके कानों की संवेदनशीलता कम हो रही है।

3. भीड़भाड़ वाली जगहों पर बातचीत में कठिनाई

रेस्तरां, बाजार या पारिवारिक समारोहों जैसे शोरगुल वाले स्थानों पर यदि आप किसी की बात नहीं समझ पा रहे हैं, तो यह चिंता का विषय है। स्वस्थ कान पृष्ठभूमि के शोर (Background Noise) को फिल्टर कर लेते हैं, लेकिन श्रवण दोष होने पर शोर के बीच आवाज पहचानना लगभग नामुमकिन हो जाता है।

4. बार-बार बात दोहराने के लिए कहना

"क्या कहा?", "एक बार फिर बोलना?"—अगर ये वाक्य आपकी बातचीत का हिस्सा बन गए हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें। किसी से एक ही बात को बार-बार दोहराने के लिए कहना इस बात का प्रमाण है कि आपके कान ध्वनियों को सही तरीके से रिसीव नहीं कर पा रहे हैं।

5. कानों में भिनभिनाहट या 'टिनिटस'

क्या आपको बिना किसी बाहरी शोर के कानों में सीटी बजने, भिनभिनाने या गूंजने जैसी आवाजें सुनाई देती हैं? चिकित्सा विज्ञान में इसे 'टिनिटस' कहा जाता है। यह अक्सर सुनने की शक्ति कम होने का सबसे पहला और चेतावनी भरा संकेत होता है।

बचाव और समाधान: क्या करें?

श्रवण हानि केवल सुनने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह आगे चलकर मानसिक तनाव और अवसाद का कारण भी बन सकती है। इससे बचने के लिए:

इयरफोन का कम से कम इस्तेमाल करें।

अत्यधिक शोर वाले स्थानों पर ईयरप्लग लगाएं।

सालाना कान की जांच (Audiometry Test) जरूर करवाएं।

समय पर लिया गया डॉक्टर का परामर्श आपकी सुनने की दुनिया को हमेशा के लिए रोशन रख सकता है।