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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : क्या आपकी उम्र भी 30 साल पार कर चुकी है? अगर हाँ, तो यह खबर आपके लिए किसी अलार्म से कम नहीं है। अक्सर हम मानते हैं कि दिल की बीमारियाँ बुढ़ापे की दस्तक हैं, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। 30 की उम्र के बाद शरीर के भीतर मेटाबॉलिज्म धीमा होने लगता है और हृदय की कार्यक्षमता पर सीधा असर पड़ता है। इस उम्र में की गई छोटी सी लापरवाही भविष्य में 'साइलेंट किलर' साबित हो सकती है।

आपकी वास्तविक उम्र से बड़ा हो सकता है आपका दिल!

प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. बिपिन कुमार दुबे के अनुसार, आजकल "हृदय की आयु" (Heart Age) आपकी वास्तविक आयु से कहीं अधिक हो सकती है। यदि आप उच्च रक्तचाप, मधुमेह या मोटापे से जूझ रहे हैं, तो मुमकिन है कि आपका दिल आपकी असली उम्र से 5 से 8 साल ज्यादा पुराना हो चुका हो। काम का बढ़ता दबाव और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच शरीर के भीतर होने वाले ये सूक्ष्म परिवर्तन बाहर से दिखाई नहीं देते, जो आगे चलकर हार्ट फेलियर का कारण बनते हैं।

धमनियों में जमा होने वाली 'वसा' है असली दुश्मन

30 वर्ष की दहलीज लांघते ही हृदय की मांसपेशियों में कड़ापन आने लगता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस उम्र के बाद शरीर में हल्की सूजन (इन्फ्लेमेशन) बढ़ने लगती है, जिससे रक्त वाहिकाओं में धीरे-धीरे फैट जमा होने लगता है। नींद की कमी, लगातार मानसिक तनाव और जंक फूड की लत इस प्रक्रिया को और तेज कर देती है। यही वजह है कि आजकल युवाओं में भी हार्ट ब्लॉकेज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

सावधान! बिना लक्षण के हमला करता है 'साइलेंट किलर'

हृदय रोगों की सबसे डरावनी बात यह है कि उच्च कोलेस्ट्रॉल और प्री-डायबिटीज जैसी स्थितियां शरीर को अंदर ही अंदर खोखला करती रहती हैं, लेकिन इनके लक्षण तुरंत नजर नहीं आते। जब तक व्यक्ति को सांस फूलने या सीने में भारीपन जैसी समस्या महसूस होती है, तब तक बीमारी गंभीर रूप ले चुकी होती है। इसीलिए डॉक्टर इसे 'साइलेंट किलर' की संज्ञा देते हैं।

दिल को फिर से 'जवान' बनाने के 5 अचूक उपाय

राहत की बात यह है कि 30 की उम्र वह पड़ाव है जहाँ आप अपनी जीवनशैली सुधारकर दिल को दोबारा नई ताकत दे सकते हैं। विशेषज्ञों ने ये 5 सुझाव दिए हैं:

एक्टिव रहें: रोजाना कम से कम 30 मिनट की तेज सैर या कार्डियो एक्सरसाइज अनिवार्य है।

डाइट पर कंट्रोल: घर का बना शुद्ध भोजन लें और बाहर के प्रोसेस्ड जंक फूड को पूरी तरह 'ना' कहें।

नींद से समझौता नहीं: हृदय को रिपेयर होने के लिए 7 से 8 घंटे की गहरी नींद बेहद जरूरी है।

तनाव प्रबंधन: योग और ध्यान (Meditation) को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।

नियमित चेकअप: साल में कम से कम एक बार ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच जरूर करवाएं।