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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : राजधानी के भारत मंडपम में आज भविष्य की तकनीक का भव्य आगाज़ हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026' का उद्घाटन करते हुए दुनिया को यह संदेश दे दिया है कि भारत अब केवल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपभोक्ता नहीं, बल्कि एक वैश्विक लीडर बनने की राह पर है। यह एक्सपो स्टार्टअप नवाचार, डिजिटल समाधान और एआई तकनीक के व्यावहारिक उपयोग को प्रदर्शित करने का सबसे बड़ा मंच बनकर उभरा है।

भारत मंडपम में एआई का जलवा: स्टार्टअप्स के बीच पहुंचे पीएम मोदी

उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने एक्सपो में लगे विभिन्न स्टॉलों का दौरा किया। उन्होंने तकनीक की बारीकियों को समझने में गहरी रुचि दिखाई और विशेषज्ञों से चर्चा की। पीएम ने विशेष रूप से 'भारत जेन' और 'सर्वम एआई' जैसे प्रमुख एआई पहलों और विभिन्न स्टार्टअप्स द्वारा तैयार किए गए प्रोटोटाइपों का अवलोकन किया। प्रधानमंत्री ने इन स्वदेशी एआई तकनीकों की सराहना करते हुए कहा कि ये समाधान आम जनता के जीवन को सरल बनाने में मील का पत्थर साबित होंगे।

जल्द शुरू होगा 'क्रिएट इन इंडिया' मिशन: अश्विनी वैष्णव का बड़ा ऐलान

समिट के दौरान केंद्रीय आईटी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार जल्द ही "क्रिएट इन इंडिया" (Create in India) मिशन शुरू करने जा रही है।

"यह मिशन सीधे तौर पर उद्योग, रोजगार और भविष्य की जरूरतों पर केंद्रित होगा। हमारा लक्ष्य भारत को एआई के क्षेत्र में दुनिया का सबसे पसंदीदा प्लेटफॉर्म बनाना और टैलेंट का एक ऐसा भंडार तैयार करना है जो ग्लोबल डिमांड को पूरा कर सके।" - अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय मंत्री

ग्लोबल साउथ का पहला एआई महाकुंभ: 'लोग, ग्रह और प्रगति' पर जोर

यह पहली बार है जब किसी विकासशील देश में इतने बड़े स्तर पर 'एआई इम्पैक्ट समिट' का आयोजन किया जा रहा है। इस सम्मेलन की थीम तीन मुख्य स्तंभों— People (लोग), Planet (ग्रह) और Progress (प्रगति) पर आधारित है। सुबह से ही शुरू हुए सत्रों में इस बात पर गहन मंथन हुआ कि कैसे एआई स्वास्थ्य सेवा (Healthcare), शिक्षा, बाल संरक्षण और फार्मास्यूटिकल्स जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।

दुनिया का एआई हब बनने की ओर भारत: क्यों खास है यह समिट?

नई दिल्ली में आयोजित यह समिट केवल चर्चा का केंद्र नहीं है, बल्कि बड़े विचारों को हकीकत में बदलने का एक जरिया है। इसमें दुनिया भर के नीति निर्माता, बिजनेस लीडर्स और शोधकर्ता हिस्सा ले रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) के नेतृत्व में भारत की भूमिका अब निर्णायक हो गई है। यह आयोजन साबित करता है कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था अब एक नए युग में प्रवेश कर चुकी है।