Prabhat Vaibhav,Digital Desk : केंद्र की मोदी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर एक ऐतिहासिक मील का पत्थर पार किया है। सोमवार, 23 फरवरी 2026 को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भारत की पहली आधिकारिक और व्यापक आतंकवाद-विरोधी नीति 'प्रहार' (PRAHAAR) को देश के सामने पेश किया। 8 पृष्ठों वाले इस सशक्त खाके के जरिए सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल सीमा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि साइबर स्पेस से लेकर डार्क वेब तक दुश्मन का शिकार किया जाएगा। यह नीति भारत की 'शून्य सहिष्णुता' (Zero Tolerance) की प्रतिबद्धता को एक नई वैज्ञानिक और तकनीकी मजबूती प्रदान करती है।
क्या है 'प्रहार' (PRAHAAR) रणनीति? आतंकवाद को जड़ से मिटाने का 6-सूत्रीय फॉर्मूला
'प्रहार' नीति महज एक दिशा-निर्देश नहीं, बल्कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक 'वॉर ब्लूप्रिंट' है। इसके प्रमुख स्तंभ इस प्रकार हैं:
इंटेलिजेंस आधारित रोकथाम: किसी भी हमले से पहले खुफिया जानकारी जुटाकर उसे नाकाम करना।
तत्काल प्रतिक्रिया: हमले की स्थिति में सुरक्षा बलों द्वारा बिजली की गति से संतुलित और घातक जवाबी कार्रवाई।
अत्याधुनिक क्षमता निर्माण: कानून प्रवर्तन एजेंसियों को आधुनिक हथियारों और सर्विलांस उपकरणों से लैस करना।
कट्टरपंथ पर लगाम: समाज में फैल रहे रेडिकलाइजेशन को रोकने के लिए सामुदायिक स्तर पर जागरूकता अभियान।
अंतर्राष्ट्रीय चक्रव्यूह: वैश्विक आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए मित्र देशों के साथ रियल-टाइम सूचना साझा करना।
विधि का शासन: आतंकवाद के खिलाफ पूरी लड़ाई मानवाधिकारों और कानूनी प्रक्रियाओं के दायरे में रहकर लड़ी जाएगी।
ड्रोन हमले और क्रिप्टो फाइनेंसिंग: नए जमाने के खतरों पर 'डिजिटल सर्जिकल स्ट्राइक'
गृह मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि आज का आतंकवाद पारंपरिक हथियारों से हटकर हाई-टेक हो चुका है। 'प्रहार' नीति विशेष रूप से इन उभरते खतरों से निपटने के लिए तैयार की गई है:
ड्रोन और साइबर हमले: सीमा पार से होने वाले ड्रोन मूवमेंट और महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर पर साइबर हमलों को रोकने के लिए विशेष 'एंटी-ड्रोन' और 'साइबर टास्क फोर्स' का गठन।
टेरर फंडिंग पर वार: क्रिप्टो वॉलेट और डार्क वेब के जरिए होने वाले आतंकी वित्तपोषण (Terror Financing) की कमर तोड़ने के लिए सख्त डिजिटल निगरानी।
CBRNED प्रोटोकॉल: रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और डिजिटल खतरों से निपटने के लिए देश भर में विशेष इमरजेंसी प्रोटोकॉल लागू किए जाएंगे।
संस्थागत समन्वय: अल कायदा और ISIS जैसे संगठनों को कड़ा संदेश
इस नई नीति में वैश्विक आतंकी संगठनों जैसे अल कायदा और आईएसआईएस से निपटने के लिए विशेष रणनीति बनाई गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आतंकवाद का कोई धर्म या जाति नहीं होती, लेकिन पड़ोसी देशों द्वारा 'प्रॉक्सी वॉर' के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे आतंकवाद का भारत अब और भी कठोर जवाब देगा। एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी को दूर करने के लिए 'एकल खिड़की समन्वय' (Single Window Coordination) तंत्र विकसित किया जाएगा, जिससे रॉ (RAW), आईबी (IB) और राज्यों की पुलिस के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान और भी तेज होगा।




