Prabhat Vaibhav,Digital Desk : महाराष्ट्र की सियासत में राज्यसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। 16 मार्च को होने वाले मतदान के लिए बिसात बिछ चुकी है। राज्य की 7 रिक्त सीटों के लिए सत्ताधारी महायुति और विपक्षी महाविकास अघाड़ी (MVA) अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं। इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या महाराष्ट्र की परंपरा के अनुरूप इस बार भी चुनाव निर्विरोध होगा? सूत्रों की मानें तो इस पूरे खेल की धुरी दिग्गज नेता शरद पवार के इर्द-गिर्द घूम रही है।
महायुति का पलड़ा भारी, 6 सीटों पर जीत लगभग तय
महाराष्ट्र विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों पर नजर डालें तो सत्ताधारी महायुति गठबंधन (बीजेपी, शिवसेना शिंदे गुट और एनसीपी अजीत पवार गुट) बेहद मजबूत स्थिति में है। बीजेपी ने पहले ही अपने चार दिग्गजों—विनोद तावड़े, रामदास अठावले, रामराव वाडकुटे और माया इवानते के नामों का ऐलान कर दिया है। गठबंधन के फॉर्मूले के तहत एक सीट एकनाथ शिंदे की शिवसेना और एक सीट अजीत पवार की एनसीपी के खाते में गई है। इस तरह महायुति 6 सीटों पर आसानी से जीत दर्ज करती दिख रही है।
विपक्ष की एक सीट और शरद पवार का 'मास्टरस्ट्रोक'
विपक्षी गठबंधन (MVA) के पास केवल एक सीट सुरक्षित निकालने का कोटा है। पहले चर्चा थी कि कांग्रेस इस सीट पर बालासाहेब थोरात या पृथ्वीराज चव्हाण को उतार सकती है। लेकिन ताजा राजनीतिक घटनाक्रम संकेत दे रहे हैं कि इस इकलौती सीट पर शरद पवार स्वयं उम्मीदवार हो सकते हैं।
कैसे निर्विरोध हो सकता है चुनाव? समझें गणित
राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए उम्मीदवार को 37 विधायकों के प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता होती है। महायुति के पास कुल 232 विधायकों का समर्थन है, जो उन्हें 6 सीटें जिताने के बाद भी अतिरिक्त वोट देता है।
रणनीति: यदि विपक्ष शरद पवार जैसे कद्दावर नेता को मैदान में उतारता है, तो सत्ताधारी दल उनके सम्मान और राजनीतिक कद को देखते हुए सातवां उम्मीदवार खड़ा करने से पीछे हट सकता है।
चुनौती: अगर विपक्ष ने शरद पवार के बजाय कांग्रेस या उद्धव गुट के किसी अन्य नेता को टिकट दिया, तो बीजेपी सातवीं सीट के लिए अपना उम्मीदवार उतारकर चुनाव को दिलचस्प और संघर्षपूर्ण बना सकती है।
परंपरा और सम्मान का दांव
महाराष्ट्र में अक्सर राज्यसभा चुनावों को आपसी सहमति से निर्विरोध संपन्न कराने की परंपरा रही है। यदि शरद पवार का नाम तय होता है, तो यह माना जा रहा है कि 16 मार्च को वोटिंग की नौबत नहीं आएगी और सभी 7 उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए जाएंगे। अब सबकी निगाहें विपक्षी गठबंधन के आधिकारिक ऐलान पर टिकी हैं।




