पश्चिम एशिया के सुलगते संघर्ष के बीच कल से शुरू होगी नेवी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस

पश्चिम एशिया के सुलगते संघर्ष के बीच कल से शुरू होगी नेवी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस

भारतीय नौसेना की कार्यकुशलता, रणनीतिक तैयारी और समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से देश की सबसे बड़ी द्वि-वार्षिक नेवी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस कल से राजधानी नई दिल्ली में पूरी भव्यता और गंभीरता के साथ शुरू होने जा रही है। वर्तमान समय में जब पश्चिम एशिया में छिड़े गंभीर संघर्ष और युद्ध के हालातों के कारण पूरी दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव अपने चरम पर है, तब भारत की समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा गलियारों की हिफाजत को लेकर यह उच्चस्तरीय बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। देश के रक्षा मंत्री, शीर्ष सैन्य अधिकारी और नौसेना के तमाम वरिष्ठ कमांडर इस चार दिवसीय महामंथन में शिरकत करेंगे, जहाँ हिंद महासागर क्षेत्र में बदलते सुरक्षा समीकरणों, समंदर के रास्ते आने वाले खतरों और भारत की रक्षात्मक तैयारियों की गहराई से समीक्षा की जाएगी। इस कॉन्फ्रेंस का मुख्य केंद्रबिन्दु देश की ऊर्जा सुरक्षा, तेल आपूर्ति के समुद्री मार्गों की हिफाजत और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती चालबाजियों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए एक ठोस रणनीति तैयार करना होगा।

पश्चिम एशिया के युद्ध और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारत की समुद्री प्राथमिकताओं का महामंथन

दुनिया के नक्शे पर पश्चिम एशिया में जिस तरह के भयंकर युद्ध और तनावपूर्ण हालात बने हुए हैं, उसका सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिकिक गतिविधियों पर पड़ना स्वाभाविक है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी समुद्री रास्ते और पश्चिम एशिया के देशों से आयात करता है, ऐसे में युद्ध के इन बादलों के बीच नौसेना की भूमिका और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती है। नेवी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस के इस सत्र में इस बात पर विशेष रूप से मंथन किया जाएगा कि यदि किसी आपातकालीन स्थिति में समुद्री व्यापार मार्ग बाधित होते हैं, तो भारतीय नौसेना किस प्रकार तुरंत हरकत में आकर सुरक्षित गलियारों का निर्माण कर सकती है। नौसेना के कमांडर आधुनिक युद्धक जहाजों, पनडुब्बियों, मानवरहित ड्रोन प्रणालियों और निगरानी विमानों की तैनाती के जरिए देश के व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए अपनी तैयारियों का बारीकी से जायजा लेंगे।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती दखलंदाजी और भारतीय नौसेना का सामरिक शक्ति प्रदर्शन

पारंपरिक दुश्मनों और समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के अलावा आज के समय में हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में चीन की बढ़ती नौसैनिक गतिविधियों और विस्तारवादी नीतियों को रोकना भारत के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता बन चुका है। भारतीय नौसेना इस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस बात पर भी गहन चर्चा करेगी कि कैसे मित्र देशों की नौसेनाओं के साथ मिलकर संयुक्त अभ्यास और गश्त बढ़ाई जाए ताकि क्षेत्र में शक्ति संतुलन को बनाए रखा जा सके। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय नौसेना ने 'प्रोजेक्ट इंडिजिनाइजेशन' यानी स्वदेशीकरण के तहत जिस रफ्तार से अपने बेड़े में नए विमानवाहक पोतों, विध्वंसकों और अत्याधुनिक हथियारों को शामिल किया है, उसने दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। इस बैठक में इन स्वदेशी हथियारों की युद्धक क्षमताओं को और अधिक धार देने तथा भविष्य की हर चुनौती से निपटने के लिए एक फुलप्रूफ ब्लूप्रिंट तैयार किया जाएगा।

तकनीक, एआई और भविष्य के समुद्री युद्ध के लिए भारतीय नौसेना का डिजिटल आधुनिकीकरण

युद्ध लड़ने के तौर-तरीके अब पूरी तरह से बदल चुके हैं, जहाँ पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष आधारित तकनीक का इस्तेमाल जीत और हार तय करता है। नेवी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में इस बात पर विशेष जोर दिया जाएगा कि कैसे भारतीय नौसेना को एक पूरी तरह से हाई-टेक और डिजिटल रूप से सुरक्षित फोर्स में बदला जाए। नौसेना के आधुनिकीकरण के इस नए दौर में मानवरहित जलपोतों (Unmanned Vessels), आधुनिक संचार प्रणालियों और साइबर डिफेंस मैकेनिज्म को सेना की मुख्य ताकत का हिस्सा बनाया जा रहा है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठनों (DRDO) के साथ तालमेल बिठाकर कैसे कम समय में स्वदेशी तकनीक को युद्धपोतों पर तैनात किया जाए, इस पर भी इस उच्चस्तरीय बैठक में कई महत्वपूर्ण और बड़े नीतिगत फैसले लिए जाने की पूरी संभावना है।

राष्ट्रीय सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को नई ऊंचाइयां देती नौसेना की यह बैठक

कल से शुरू होने जा रही यह नेवी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस केवल एक प्रशासनिक बैठक मात्र नहीं है, बल्कि यह इस बात का स्पष्ट संदेश है कि नया भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए अब किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' के सपने को साकार करते हुए भारतीय नौसेना ने आने वाले दशकों के लिए जो विजन तैयार किया है, उसकी सफलता की रूपरेखा इसी सम्मेलन में तय की जाएगी। देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा करने वाले हमारे जांबाज नौसैनिक कमांडर जब अगले चार दिनों तक मंथन करेंगे, तो उससे निकलने वाले निष्कर्ष आने वाले समय में भारत को एक महाशक्ति के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाएंगे। हर देशवासी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह सम्मेलन हमारे सुरक्षा तंत्र को और कितना अधिक अभेद्य और आधुनिक बनाने में सफल होता है।