Prabhat Vaibhav,Digital Desk : शारदीय हो या चैत्र, नवरात्रि के नौ दिन शक्ति की उपासना के लिए सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं। जहाँ एक ओर भक्त मां दुर्गा की भक्ति में लीन होकर सात्विक पूजा करते हैं, वहीं दूसरी ओर इन नौ रातों का उपयोग तांत्रिक और अघोरी अपनी 'सिद्धि' प्राप्त करने के लिए भी करते हैं। अक्सर देखा गया है कि इन दिनों श्मशान घाटों और निर्जन स्थानों पर तांत्रिक गतिविधियां अचानक बढ़ जाती हैं। आखिर इन नौ दिनों में ऐसा क्या खास होता है कि तंत्र-मंत्र की दुनिया सक्रिय हो जाती है और इसका साधारण जनमानस पर क्या प्रभाव पड़ता है? आइए जानते हैं इसके पीछे का रहस्य और इससे सुरक्षित रहने के तरीके।
नवरात्रि में तंत्र साधना का मुख्य उद्देश्य और रहस्य
शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि की रातें 'महारात्रि' की श्रेणी में आती हैं। तांत्रिकों का मानना है कि इन नौ दिनों में ब्रह्मांड की ऊर्जा का स्तर बहुत ऊंचा होता है और देवी की शक्तियां पृथ्वी के सबसे करीब होती हैं। तांत्रिक क्रियाओं का मुख्य मकसद किसी को नुकसान पहुंचाना ही नहीं, बल्कि कठिन सिद्धियां प्राप्त करना, वशीकरण, या अपनी आध्यात्मिक शक्ति को बढ़ाना होता है। हालांकि, कुछ उपद्रवी तत्व इन शक्तियों का दुरुपयोग दूसरों के व्यापार, स्वास्थ्य या गृहस्थ जीवन में बाधा उत्पन्न करने के लिए भी करते हैं। इन रातों में किए गए मंत्र जाप का फल अन्य दिनों की तुलना में हजार गुना अधिक मिलता है, इसीलिए इसे तंत्र साधना का 'स्वर्ण काल' कहा जाता है।
किसे नुकसान पहुंचाने की होती है मंशा और क्या हैं लक्षण
नकारात्मक शक्तियों का प्रयोग अक्सर उन लोगों पर किया जाता है जिनके घर में कलह हो या जिनका आत्मविश्वास कमजोर हो। तांत्रिक क्रियाओं का शिकार व्यक्ति अचानक बीमार रहने लगता है, उसे डरावने सपने आते हैं या बिना किसी कारण के उसके काम बिगड़ने लगते हैं। कई बार जलन या द्वेष की भावना से लोग अपने विरोधियों की प्रगति रोकने के लिए इन नौ दिनों में 'अभिचार कर्म' का सहारा लेते हैं। विशेषकर अष्टमी और नवमी की रात को 'निशा पूजा' के दौरान नकारात्मक शक्तियों को जागृत करने के प्रयास किए जाते हैं, जिससे कमजोर मानसिक बल वाले लोग जल्दी प्रभावित हो सकते हैं।
नकारात्मक शक्तियों से बचने के अचूक और सरल उपाय
यदि आपको डर है कि आपके आसपास या आप पर कोई तांत्रिक प्रभाव है, तो नवरात्रि के दौरान कुछ विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए। सबसे पहले, इन नौ दिनों में अपने घर में अखंड ज्योति प्रज्वलित रखें और सुबह-शाम 'दुर्गा सप्तशती' या 'हनुमान चालीसा' का पाठ करें। घर के मुख्य द्वार पर गंगाजल छिड़कें और आम के पत्तों का वंदनवार लगाएं। चौराहे पर रखे हुए नींबू, सिंदूर या किसी भी लावारिस वस्तु को छूने से बचें। यदि संभव हो तो गले में सिद्ध किया हुआ रुद्राक्ष धारण करें या पास में कपूर और लौंग रखें। माता रानी की सच्ची भक्ति और सकारात्मक विचार ही किसी भी बुरी शक्ति का सबसे बड़ा काट हैं।
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