Prabhat Vaibhav,Digital Desk : नगर निगम मेयर चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी चरम पर है। मतदान में अब कुछ ही घंटे शेष हैं, लेकिन किसी भी दल को अपनी जीत को लेकर पूरी तरह भरोसा नहीं है। पार्षदों के रुख बदलने और क्रॉस वोटिंग की आशंका ने भाजपा, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस—तीनों की चिंता बढ़ा दी है। इसी कारण सभी दल अपने-अपने पार्षदों को एकजुट रखने के लिए रणनीतिक कदम उठा रहे हैं।
भाजपा ने मोरनी रिजॉर्ट में बनाया सियासी ठिकाना
सूत्रों के अनुसार भारतीय जनता पार्टी ने अपने सभी पार्षदों को चंडीगढ़ से बाहर पंचकूला के मोरनी क्षेत्र स्थित एक रिजॉर्ट में ठहराया है। यहां पार्षदों को एक साथ रखकर चुनावी रणनीति पर मंथन किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि बाहरी राजनीतिक संपर्क और दबाव से बचाने के लिए पार्षदों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
18 पार्षदों के बावजूद आश्वस्त नहीं भाजपा
नगर निगम में भाजपा के पास 18 पार्षदों का समर्थन बताया जा रहा है, इसके बावजूद पार्टी नेतृत्व पूरी तरह निश्चिंत नहीं है। अंतिम समय में किसी भी पार्षद के रुख बदलने से चुनावी गणित बिगड़ने की आशंका बनी हुई है। साथ ही पार्टी को इस बात का भी डर है कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी चुनाव के दिन हाथ मिला सकती हैं, जिससे मुकाबला बेहद दिलचस्प हो सकता है।
आप ने गढ़शंकर में ठहराए पार्षद, अंदरूनी कलह उजागर
दूसरी ओर आम आदमी पार्टी ने अपने पार्षदों को पंजाब के गढ़शंकर में ठहराया है। हालांकि पार्टी की स्थिति पूरी तरह मजबूत नहीं मानी जा रही। जानकारी के मुताबिक आप के दो से तीन पार्षद गढ़शंकर में मौजूद नहीं हैं और वे फिलहाल चंडीगढ़ में ही बताए जा रहे हैं।
टिकट को लेकर नाराजगी बनी चुनौती
आम आदमी पार्टी के भीतर प्रत्याशी घोषित न किए जाने को लेकर असंतोष सामने आया है। नाराज पार्षदों में रामचंद्र यादव, दमनप्रीत समेत एक अन्य पार्षद का नाम चर्चा में है। यह नाराजगी चुनाव से पहले पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरी है।
कांग्रेस भी सक्रिय, अंतिम समय के समीकरण पर नजर
कांग्रेस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है। पार्टी नेतृत्व अपने पार्षदों के लगातार संपर्क में है और हर संभावित रणनीति पर विचार किया जा रहा है। कांग्रेस को उम्मीद है कि अंतिम समय में समीकरण उसके पक्ष में बन सकते हैं। वहीं आम आदमी पार्टी के साथ संभावित तालमेल को लेकर भी अंदरखाने चर्चाएं जारी हैं।
बेहद रोचक और अनिश्चित हुआ मेयर चुनाव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार का मेयर चुनाव पूरी तरह अनिश्चित हो गया है। किसी भी दल के पास फिलहाल जीत का स्पष्ट आंकड़ा नहीं है। ऐसे में पार्षदों की एकजुटता और आखिरी वक्त की रणनीति ही तय करेगी कि मेयर की कुर्सी किसके हाथ लगेगी।




