Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पंजाब विधानसभा का सत्र आज एक बार फिर हंगामे की भेंट चढ़ गया। शून्य काल (Zero Hour) के दौरान कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा द्वारा महिलाओं और अनुसूचित जाति समुदाय को लेकर दिए गए एक कथित विवादास्पद बयान ने सदन का माहौल गरमा दिया। सत्ता पक्ष के विधायकों के भारी शोर-शराबे के कारण स्पीकर को सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित करनी पड़ी।
विवाद की जड़: खैरा का वह सोशल मीडिया बयान
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सदन में सुखपाल खैरा का एक इंटरनेट मीडिया पर दिया गया बयान पढ़कर सुनाया।
विवादास्पद टिप्पणी: आरोप है कि खैरा ने अपनी पोस्ट में कहा— "1000 रुपये लेकर औरतें कौन से सूरमाओं को पैदा कर देंगी।"
सरकार का पक्ष: हरपाल चीमा ने इस बयान को अनुसूचित जाति समुदाय की बहू-बेटियों का घोर अपमान बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं की मानसिकता महिलाओं और दलित समाज के प्रति हमेशा से अपमानजनक रही है। चीमा ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेसी नेताओं को "मानसिक स्वास्थ्य लाभ" की जरूरत है।
प्रताप बाजवा की माफी और बचाव
विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने मामले को शांत करने की कोशिश की। उन्होंने कहा:
माफी: बाजवा ने कहा कि उन्होंने खैरा का वह बयान खुद नहीं देखा है, लेकिन अगर उन्होंने ऐसा कहा है, तो वह (बाजवा) इसके लिए सदन से क्षमा मांगते हैं।
दलित राजनीति पर सफाई: चीमा द्वारा कांग्रेस को दलित विरोधी बताए जाने पर बाजवा ने पलटवार किया। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस ने ही बूटा सिंह जैसे कद्दावर नेताओं को देश का गृहमंत्री बनाया है।
"माफी योग्य नहीं है बयान": महिला विधायकों का गुस्सा
प्रताप बाजवा की माफी के बावजूद आम आदमी पार्टी की महिला विधायक शांत नहीं हुईं।
कड़ा विरोध: विधायक इंद्रजीत मान और सरबजीत कौर अपनी सीटों पर खड़ी हो गईं और कहा कि यह बयान पूरी महिला शक्ति का अपमान है और यह केवल माफी से खत्म होने वाला मुद्दा नहीं है।
कार्रवाई की मांग: उन्होंने सुखपाल खैरा के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की मांग की। विधायकों के बढ़ते तेवर और शोर-शराबे को देखते हुए स्पीकर ने सदन की कार्यवाही को मुल्तवी (Postpone) कर दिया।
क्यों गरमाया है मामला?
पंजाब सरकार द्वारा महिलाओं को दी जाने वाली ₹1000 की वित्तीय सहायता (सम्मान निधि) को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। खैरा की कथित टिप्पणी को इसी योजना के संदर्भ में जोड़कर देखा जा रहा है, जिसे 'आप' ने महिलाओं की गरिमा से जोड़कर बड़ा मुद्दा बना दिया है।




