बीजेपी जिलाध्यक्ष को कहा 'शराबी', फिर थाने के अंदर गूंजी हनुमान चालीसा
देश के राजनीतिक गलियारों और पुलिस-प्रशासनिक व्यवस्था के बीच अक्सर तनातनी की खबरें सामने आती रहती हैं, लेकिन राजस्थान के बारां (Baran) जिले के अटरू थाने (Atru Police Station) से जो सनसनीखेज मामला सामने आया है, उसने सबको हैरान कर दिया है। सत्ताधारी पार्टी के एक युवा पदाधिकारी और स्थानीय पुलिस स्टेशन के थाना प्रभारी (CI) के बीच उपजा विवाद इतना बढ़ गया कि देखते ही देखते पूरा थाना छावनी में तब्दील हो गया। आरोप है कि एक मामले की शिकायत को लेकर जब बातचीत चल रही थी, तब पुलिस अधिकारियों की तरफ से जिलाध्यक्ष के खिलाफ बेहद अमर्यादित और आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद थाने के भीतर जो कुछ हुआ, उसने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया और आधी रात तक चले ड्रामे के बाद आखिरकार गाज थाना प्रभारी पर गिर ही गई।
क्या थी पूरी घटना और कैसे शुरू हुआ थाने तक पहुंचा यह विवाद?
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत अटरू के वार्ड 24 निवासी अजय वैष्णव नामक एक स्थानीय व्यक्ति की शिकायत से हुई थी। पीड़ित अजय मारपीट की एक घटना के सिलसिले में न्याय की गुहार लगाने थाने पहुंचा था, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने उसकी रिपोर्ट लिखने और तुरंत कार्रवाई करने में टालमटोल शुरू कर दी। जब स्थानीय स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हुई, तो उसने भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के जिलाध्यक्ष रोहित नागर को फोन पर पूरी बात बताई। इसी बीच यह खबर मिली कि आरोपियों ने फिर से पीड़िता के घर पर जाकर हंगामा और दबंगई की है। इसके बाद भाजयुमो जिलाध्यक्ष रोहित नागर ने अटरू थाने के सीआई अशोक वर्मा को फोन करके तत्काल पुलिस जाब्ता मौके पर भेजने का गंभीर अनुरोध किया।
पुलिसकर्मी और जिलाध्यक्ष के बीच तीखी बहस, सीआई द्वारा कथित अपमानजनक टिप्पणी
फोन पर बातचीत के दौरान स्थिति तब और बिगड़ गई जब कथित तौर पर एक पुलिसकर्मी और भाजयुमो जिलाध्यक्ष के बीच तीखी नोकझोक और बहस शुरू हो गई। जब जिलाध्यक्ष ने इस बदसलूकी की शिकायत सीधे थाना प्रभारी (CI) अशोक वर्मा से की, तो आरोप है कि सीआई ने अपने मातहत पुलिसकर्मी का बचाव किया और जिलाध्यक्ष के खिलाफ कथित तौर पर 'शराबी' जैसी बेहद अमर्यादित और अपमानजनक टिप्पणी कर डाली। जनप्रतिनिधि और युवा मोर्चे के जिलाध्यक्ष के साथ इस तरह की भाषा का प्रयोग किए जाने की खबर आग की तरह पूरे इलाके में फैल गई। सत्ता पक्ष के नेताओं और कार्यकर्ताओं का मानना था कि एक जनप्रतिनिधि के साथ ऐसा बर्ताव पुलिस की मनमानी और अहंकार को दर्शाता है।
थाने के अंदर गूंजी हनुमान चालीसा, 4 घंटे तक चला हाई-वोल्टेज धरना-प्रदर्शन
इस अपमानजनक टिप्पणी और पुलिस के रवैये के विरोध में स्थानीय बीजेपी नेता, पदाधिकारी और सैकड़ों कार्यकर्ता तुरंत अटरू थाने के बाहर और भीतर इकट्ठा हो गए। देखते ही देखते थाने परिसर में भाजपा दिग्गजों और कार्यकर्ताओं का भारी जमावड़ा लग गया। पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और आरोपी सीआई के खिलाफ तत्काल प्रभाव से कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई गई। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों पर नैतिक दबाव बनाने के लिए भाजपाइयों ने थाने के भीतर ही बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया। लगभग 4 घंटे तक थाने के अंदर चले इस नाटकीय और तनावपूर्ण माहौल ने पुलिस अधिकारियों के हाथ-पांव फुला दिए।
आधी रात को आया बड़ा एक्शन, सीआई सस्पेंड और लाइन हाजिर
मामले की गंभीरता को देखते हुए और उच्च स्तर पर राजनीतिक दबाव बढ़ने के बाद जिला पुलिस के बड़े अधिकारियों ने तुरंत हस्तक्षेप किया। स्थिति को बेकाबू होते देख और संगठन की नाराजगी भांपते हुए देर रात प्रशासनिक स्तर पर कड़ा कदम उठाया गया। अटरू थाने के तत्कालीन सीआई अशोक वर्मा को तत्काल प्रभाव से पद से हटाते हुए लाइन हाजिर कर दिया गया और सस्पेंड करने की कार्रवाई की गई। उच्च अधिकारियों द्वारा मामले की निष्पक्ष जांच के आश्वासन और सीआई पर गाज गिरने के बाद धरना समाप्त हुआ। यह घटना इस बात का बड़ा उदाहरण है कि सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं और स्थानीय पुलिस के बीच टकराव होने पर किस तरह प्रशासनिक मशीनरी को तुरंत झुकना पड़ता है।