कैबेज द्वीप पर ऑस्ट्रेलिया का हैरान कर देने वाला वैज्ञानिक प्रयोग

कैबेज द्वीप पर ऑस्ट्रेलिया का हैरान कर देने वाला वैज्ञानिक प्रयोग

प्रकृति का संतुलन बनाए रखने और लुप्तप्राय जीवों तथा वनस्पतियों की रक्षा करने के लिए कभी-कभी कड़े और अप्रत्याशित कदम उठाने पड़ते हैं। कुछ ऐसा ही अनोखा और अभूतपूर्व कदम ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों ने कैबेज द्वीप (Cabbage Tree Island) पर उठाया है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। कैबेज द्वीप पर पारिस्थतिक तंत्र (Ecosystem) को पूरी तरह तबाह कर रहे खरगोशों की बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने और द्वीप के मूल निवासी दुर्लभ पक्षियों व वनस्पतियों को बचाने के लिए बड़े पैमाने पर जहर युक्त चारे (Poisoned Bait) का छिड़काव किया गया है। प्रथम दृष्ट्या भले ही यह कदम थोड़ा कठोर और क्रूर नजर आए, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि इस एक ऐतिहासिक फैसले ने द्वीप के समूचे पर्यावरण को तबाही के मुहाने से बचा लिया है और यह प्रयोग आज पूरी दुनिया के लिए एक अनूठी मिसाल बन चुका है।

मासूम दिखने वाले खरगोश कैसे बने इस खूबसूरत द्वीप के पर्यावरण के सबसे बड़े दुश्मन?

आम तौर पर खरगोशों को बेहद मासूम और शांत जीव माना जाता है, लेकिन जब ये किसी सीमित पारिस्थितिकी तंत्र वाले द्वीप पर बिना किसी प्राकृतिक शिकारी (Natural Predator) के अनियंत्रित रूप से प्रजनन करने लगते हैं, तो ये किसी विनाशकारी आपदा से कम साबित नहीं होते। कैबेज द्वीप पर इंसान द्वारा लाए गए इन खरगोशों ने द्वीप की हरी-भरी घास, झाड़ियों और छोटे पौधों को बेदर्दी से चबाकर पूरी तरह नष्ट कर दिया था। इसके कारण जमीन का भारी कटाव होने लगा था और द्वीप के मूल निवासी दुर्लभ गोल्ड-क्रस्टेड पेट्रेल (Gould's Petrel) पक्षी के घोंसले और उनके प्राकृतिक आवास पूरी तरह तबाह हो गए थे। खरगोशों की इस भारी मौजूदगी के कारण कई स्थानीय पेड़-पौधों की प्रजातियां विलुप्ति की कगार पर पहुंच गई थीं, जिससे वैज्ञानिकों को मजबूरन यह सख्त कदम उठाना पड़ा।

जहर वाला चारा और हवाई अभियानों के जरिए खरगोशों के खात्मे की पूरी रणनीति

वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों की टीम ने कैबेज द्वीप पर खरगोशों का पूरी तरह से सफाया करने के लिए एक बेहद सटीक और वैज्ञानिक रणनीति तैयार की। द्वीप के चप्पे-चप्पे पर खास तरह के जहर से युक्त चारे को फैलाया गया। इसके साथ ही, कई चरणों में ड्रोन और हेलीकॉप्टरों की मदद से उन दुर्गम इलाकों में भी इस चारे को पहुंचाया गया जहां इंसानों का पहुंचना बेहद मुश्किल था। इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि इस जहर का असर द्वीप के अन्य स्थानीय पक्षियों और समुद्री जीवों पर न पड़े। लगातार कई हफ्तों तक चले इस सघन अभियान के बाद आखिरकार कैबेज द्वीप को पूरी तरह से खरगोशों के आतंक से मुक्त करा लिया गया।

खरगोशों के खात्मे के बाद कैबेज द्वीप पर लौटा जीवन, दुनिया भर के लिए बना मिसाल

इस बड़े और अनोखे प्रयोग के परिणाम इतने चमत्कारी रहे कि पर्यावरण विज्ञानी खुद हैरान रह गए। खरगोशों के सफाए के कुछ ही महीनों के भीतर कैबेज द्वीप की वनस्पतियां फिर से लहलहाने लगीं और जमीन का क्षरण पूरी तरह थम गया। सबसे बड़ी बात यह रही कि संकटग्रस्त Gould's Petrel पक्षियों की आबादी में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई और वे एक बार फिर अपने सुरक्षित घोंसलों में लौटने लगे। संयुक्त राष्ट्र और दुनिया भर के पर्यावरण संरक्षण संगठनों ने ऑस्ट्रेलिया के इस सफल मॉडल की जमकर सराहना की है। यह प्रयोग साबित करता है कि जब किसी विदेशी आक्रमणकारी प्रजाति (Invasive Species) से किसी द्वीप के नाजुक पर्यावरण को खतरा पैदा होता है, तो वैज्ञानिक तरीकों से उठाए गए कड़े कदम संपूर्ण जैव विविधता को नया जीवन दे सकते हैं।