एशियन पैरा गेम्स में भारत की स्वर्णिम सफलता: रिंकू ने 65.11 मीटर थ्रो के साथ रचा इतिहास, अजीत को मिला सिल्वर
चीन के हांगझोउ में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में भारतीय पैरा-एथलीटों का दबदबा पूरी रंगत में देखने को मिल रहा है। पुरुषों की भाला फेंक (F46 श्रेणी) स्पर्धा में भारत के स्टार एथलीटों ने दोहरा धमाका करते हुए एक बार फिर तिरंगा लहराया है। भारत के होनहार एथलीट रिंकू हुड्डा ने अपनी असाधारण क्षमता और अद्भुत प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए 65.11 मीटर का विशाल थ्रो फेंककर न केवल स्वर्णिम सफलता (Gold Medal) हासिल की, बल्कि एक नया गेम्स रिकॉर्ड भी अपने नाम दर्ज कर लिया। इसी स्पर्धा में भारत के ही दिग्गज भाला फेंक खिलाड़ी अजीत सिंह ने भी शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए सिल्वर मेडल (रजत पदक) पर कब्जा जमाया। भारत के इन दोनों जांबाजों ने पोडियम पर पहले और दूसरे स्थान पर कब्जा जमाकर पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।
रिंकू हुड्डा का ऐतिहासिक 65.11 मीटर का थ्रो, विरोधी खिलाड़ियों के छूटे पसीने
भाला फेंक F46 स्पर्धा की शुरुआत से ही भारतीय एथलीटों का इरादा एकदम साफ नजर आ रहा था। रिंकू हुड्डा ने मुकाबले के शुरुआती प्रयासों से ही अपने प्रतिद्वंदियों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया था। जैसे ही उन्होंने अपने छठे और अंतिम प्रयास में पूरी ताकत के साथ भाला हवा में फेंका, वह 65.11 मीटर की दूरी तय कर जमीन से जा टकराया। स्टेडियम में मौजूद दर्शक और तकनीकी अधिकारी उनके इस विशाल थ्रो को देखकर दंग रह गए। यह प्रदर्शन उनके करियर का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन साबित हुआ और इसके साथ ही उन्होंने नया एशियन पैरा गेम्स रिकॉर्ड भी कायम कर दिया। रिंकू की इस उपलब्धि ने साबित कर दिया कि निरंतर कड़े अभ्यास और अटूट इच्छाशक्ति के बल पर किसी भी बड़े वैश्विक मंच को फतह किया जा सकता है।
अजीत सिंह ने जीता सिल्वर मेडल, भाला फेंक में भारत की ऐतिहासिक दोहरी जीत
स्पर्धा में भारत की स्वर्णिम सफलता के साथ-साथ अजीत सिंह का प्रदर्शन भी बेहद सराहनीय और रोमांचक रहा। अजीत सिंह ने कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच बेहतरीन तकनीक और मानसिक संतुलन का परिचय देते हुए भाला फेंका और दूसरा सर्वश्रेष्ठ थ्रो हासिल कर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। एक ही अंतरराष्ट्रीय इवेंट में भारत के दो खिलाड़ियों द्वारा गोल्ड और सिल्वर मेडल जीतने का यह क्षण भारतीय खेल प्रेमियों के लिए बेहद भावुक और गर्व महसूस कराने वाला रहा। अजीत सिंह ने अपने इस शानदार प्रदर्शन से यह दिखा दिया कि वे भी आने वाले पैरालंपिक खेलों में देश के लिए एक बड़े पदक के तगड़े दावेदार हैं। दोनों खिलाड़ियों ने अपनी जीत का श्रेय अपने कोच, परिवार और देशवासियों के समर्थन को दिया है।
पैरा एथलीटों को मिल रही सरकारी सुविधाएं और टॉप्स (TOPS) योजना का दिखा असर
एशियन पैरा गेम्स में भारतीय एथलीटों द्वारा लगातार किए जा रहे ऐतिहासिक प्रदर्शन के पीछे सालों की कड़ी मेहनत और भारत सरकार द्वारा खेल के बुनियादी ढांचे में किया गया भारी निवेश है। खेल मंत्रालय, भारतीय पैरालंपिक समिति (PCI) और टार्गेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) के तहत एथलीटों को प्रदान की जाने वाली अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग, अत्याधुनिक उपकरण, न्यूट्रिशन और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुविधाओं ने खिलाड़ियों के प्रदर्शन को निखारने में बड़ी भूमिका निभाई है। भारत अब न केवल सामान्य खेलों में बल्कि पैरा-स्पोर्ट्स में भी एशिया और दुनिया की अग्रणी शक्तियों में शुमार हो चुका है। रिंकू और अजीत की इस दोहरी सफलता ने देश में उभरती नई खेल संस्कृति को एक नया आयाम दिया है।
प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ने दी बधाई, देश भर में खिलाड़ियों की जीत का जश्न
रिंकू हुड्डा द्वारा रिकॉर्ड तोड़ गोल्ड मेडल और अजीत सिंह द्वारा सिल्वर मेडल जीतने के तुरंत बाद देश भर में खुशी की लहर दौड़ गई। देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से दोनों एथलीटों को उनकी इस अद्वितीय और ऐतिहासिक उपलब्धि पर हार्दिक बधाई दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि रिंकू का रिकॉर्ड-तोड़ प्रदर्शन और अजीत का शानदार जज्बा देश के करोड़ों युवाओं और दिव्यांगजनों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। खेल जगत के दिग्गजों, पूर्व खिलाड़ियों और आम नागरिकों ने भी इन दोनों जांबाजों के समर्पण और भारत को वैश्विक पटल पर गौरवान्वित करने के लिए जमकर तारीफ की है। हांगझोउ में राष्ट्रगान की गूंज और तिरंगे का फहराना हर भारतीय के लिए अविस्मरणीय पल बन गया।