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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तर प्रदेश में आगामी पंचायत चुनावों को लेकर हलचल तेज हो गई है। पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण के मुद्दे पर राज्य सरकार ने अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बड़ा अपडेट देते हुए कहा है कि ओबीसी आरक्षण के प्रस्ताव को अगली कैबिनेट बैठक में मंजूरी मिल जाएगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बार आरक्षण के निर्धारण के लिए कोई नई गणना या सर्वे नहीं कराया जाएगा, जिससे चुनावी प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।

कैबिनेट की अगली बैठक में फाइनल होगा ड्राफ्ट

पंचायती राज मंत्री के अनुसार, विभाग ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है। आरक्षण की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए तैयार किए गए प्रस्ताव को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में होने वाली अगली कैबिनेट बैठक में रखा जाएगा। सरकार की प्राथमिकता है कि आरक्षण का पेंच जल्द से जल्द सुलझा लिया जाए ताकि राज्य निर्वाचन आयोग को चुनाव की तारीखों के एलान के लिए हरी झंडी दी जा सके। मंत्री ने साफ किया कि सरकार सामाजिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए ओबीसी वर्ग के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

पुरानी गणना पर ही आधारित होगा आरक्षण का ढांचा

विपक्ष और विभिन्न संगठनों की ओर से नई जातिगत गणना की मांग के बीच सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वर्तमान में मौजूद आंकड़ों के आधार पर ही सीटों का आवंटन किया जाएगा। मंत्री राजभर ने कहा कि आरक्षण के लिए किसी नई गणना की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि मौजूदा डेटा और 2011 की जनगणना के आधार पर जो रोटेशन प्रणाली है, वह पर्याप्त है। इस फैसले से उन अटकलों पर विराम लग गया है जिनमें कहा जा रहा था कि नई गणना के कारण चुनावों में लंबा विलंब हो सकता है।

चुनाव की तैयारियों ने पकड़ी रफ्तार

आरक्षण की स्थिति साफ होने के साथ ही पंचायती राज विभाग और जिला प्रशासनों ने अपनी कमर कस ली है। सीटों के परिसीमन और रोटेशन (चक्रानुक्रम) की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि कैबिनेट की मंजूरी के तुरंत बाद आरक्षण की अंतिम सूची जारी कर दी जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि संवैधानिक समय सीमा के भीतर शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से मतदान संपन्न कराया जाए। गांव की सरकार चुनने के लिए उत्सुक मतदाताओं के लिए यह अपडेट किसी बड़ी राहत से कम नहीं है।