Prabhat Vaibhav,Digital Desk : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अब अमेरिकी रक्षा मंत्रालय यानी पेंटागन के भीतर ही एक बड़ा बवंडर खड़ा कर दिया है। हाल ही में ईरान के खिलाफ संभावित युद्ध की तैयारियों और अमेरिकी नीतियों के विरोध में इस्तीफा देने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी अब खुद मुश्किलों के घेरे में आ गए हैं। अमेरिकी जांच एजेंसियों ने इस पूर्व अधिकारी के खिलाफ एक बड़ी जांच शुरू कर दी है। शक गहरा है कि इस्तीफा देने से पहले या उसके बाद इस अधिकारी ने कुछ ऐसी 'क्लासिफाइड' (वर्गीकृत) जानकारियां लीक की हैं, जो देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती हैं।
नीति के खिलाफ बगावत या देशद्रोह? जांच के दायरे में पूर्व अधिकारी
मिली जानकारी के मुताबिक, इस अधिकारी ने अमेरिका द्वारा मध्य पूर्व (Middle East) में ईरान के खिलाफ अपनाई जा रही आक्रामक रणनीति पर गंभीर सवाल उठाए थे। अधिकारी का तर्क था कि अमेरिका एक और अंतहीन युद्ध की ओर बढ़ रहा है। हालांकि, इस्तीफा देना उनका अधिकार था, लेकिन पेंटागन को खुफिया जानकारी मिली है कि उनके पास मौजूद संवेदनशील दस्तावेजों और डिजिटल डेटा का गलत इस्तेमाल हुआ है। संघीय जांच ब्यूरो (FBI) और रक्षा खुफिया एजेंसी अब इस बात की तहकीकात कर रही हैं कि क्या इस अधिकारी ने जानबूझकर खुफिया जानकारी को सार्वजनिक किया या किसी विदेशी ताकत के साथ साझा किया।
ईरान युद्ध की रणनीतियां और 'लीक' का डर
सूत्रों का कहना है कि जो जानकारी लीक होने का शक है, उसमें ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले की योजना, इजरायल के साथ अमेरिकी समन्वय और खाड़ी क्षेत्र में तैनात अमेरिकी बेड़ों की लोकेशन से जुड़े इनपुट्स शामिल हो सकते हैं। अगर ये खबरें सच साबित होती हैं, तो यह न केवल जो बाइडन प्रशासन के लिए एक बड़ा झटका होगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की जासूसी क्षमता और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर भी सवालिया निशान लगा देगा। अधिकारी के घर और डिजिटल डिवाइसेज की तलाशी ली जा रही है ताकि 'ट्रेल' का पता लगाया जा सके।
पेंटागन की सख्त कार्रवाई और बढ़ता तनाव
फिलहाल पेंटागन ने इस अधिकारी के नाम का खुलासा नहीं किया है, लेकिन इस मामले ने वाशिंगटन के राजनीतिक गलियारों में गर्मी पैदा कर दी है। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि नीतियों पर असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी के साथ खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं, ईरान ने इस घटनाक्रम पर पैनी नजर बना रखी है। जानकारों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासों की ओर इशारा कर रहा है, जो अमेरिका-ईरान संबंधों में आग में घी डालने का काम करेगा।
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