राज्यसभा चुनाव का ऐलान: 10 सीटों पर क्या है सियासी समीकरण? BJP को मिलेंगी कितनी सीटें, क्या BSP हो जाएगी पूरी तरह 'शून्य'

राज्यसभा चुनाव का ऐलान: 10 सीटों पर क्या है सियासी समीकरण? BJP को मिलेंगी कितनी सीटें, क्या BSP हो जाएगी पूरी तरह 'शून्य'

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव आयोग ने बिगुल फूंक दिया है, जिसके तहत 16 अक्टूबर को मतदान संपन्न होगा। उच्च सदन में प्रतिनिधित्व के लिहाज से यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण और दिलचस्प माना जा रहा है। इन 10 सीटों पर आसीन वर्तमान सांसदों का 6 वर्षीय कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। वर्तमान स्थिति में इन 10 सीटों में से 8 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP), एक सीट पर समाजवादी पार्टी (SP) और एक सीट पर बहुजन समाज पार्टी (BSP) का कब्जा है। इस चुनाव के साथ ही उत्तर प्रदेश और संसद के इतिहास में एक बड़ा सियासी मोड़ आने वाला है, जहां भाजपा अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है, वहीं मायावती की बसपा का संसदीय वजूद शून्य पर सिमटने के कगार पर पहुंच गया है।

यूपी विधानसभा का संख्याबल और एक सीट जीतने का गणित

राज्यसभा चुनाव में सीधे जनता मतदान नहीं करती, बल्कि राज्य विधानसभा के निर्वाचित विधायक अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा की कुल स्वीकृत क्षमता 403 सदस्यों की है। वर्तमान में 6 विधायकों के निधन और रिक्तियों के कारण विधानसभा की प्रभावी संख्या 397 रह गई है। राज्यसभा चुनाव के आनुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल संक्रमणीय मत प्रणाली के फॉर्मूले [कुल वैध मत / (रिक्त सीटें + 1) + 1] के आधार पर एक उम्मीदवार को उच्च सदन की चौखट पार करने के लिए कम से कम 37 प्रथम वरीयता मतों (विधायकों के वोट) की आवश्यकता होगी।

7 सीटों पर भाजपा की जीत तय, 8वीं सीट पर नजर

विधानसभा में संख्याबल के आधार पर भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का पलड़ा पूरी तरह भारी नजर आ रहा है। भाजपा के पास अकेले 256 विधायक हैं और सहयोगियों को मिलाकर एनडीए के पास यह आंकड़ा लगभग 289 से 291 मतों तक पहुंचता है। यदि प्रति सीट 37 वोटों के हिसाब से गणना की जाए, तो भाजपा गठबंधन के 7 उम्मीदवार (37 × 7 = 259) बहुत आसानी से और सीधे तौर पर जीत हासिल कर लेंगे। 7 सीटें निकालने के बाद भी एनडीए के पास करीब 30 से 32 अतिरिक्त वोट शेष बचेंगे। आठवीं सीट पर विजय पताका फहराने के लिए भाजपा को केवल 5 से 7 अतिरिक्त वोटों की दरकार होगी। ऐसे में निर्दलीय विधायकों, छोटे दलों और विपक्षी खेमे के असंतुष्ट विधायकों की संभावित क्रॉस वोटिंग के सहारे भाजपा 8वीं सीट भी अपने पाले में डालने की मजबूत स्थिति में दिख रही है।

समाजवादी पार्टी को मिलेंगी 2 सीटें, 10वीं सीट पर फंसा पेंच

विपक्षी खेमे में मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) के पास 101 विधायक हैं और कांग्रेस के 2 विधायकों का साथ भी उसे हासिल है। दो राज्यसभा सीटें जीतने के लिए कुल 74 वोटों (37 × 2) की आवश्यकता है। सपा के पास पर्याप्त संख्याबल मौजूद है, इसलिए वह आसानी से अपनी दो सीटें जीत लेगी। इससे पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रो. रामगोपाल यादव के अलावा एक अन्य नेता उच्च सदन पहुंच सकेंगे, जिससे सपा को एक सीट का अतिरिक्त फायदा होगा। दो सीटें सुरक्षित करने के बाद सपा के पास भी करीब 27 से 29 वोट बचते हैं। असली सियासी घमासान 10वीं सीट के लिए छिड़ेगा, जहां भाजपा और सपा दोनों ही अपने बचे हुए वोटों और अन्य दलों के समर्थन के दम पर अपना उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को रोमांचक बना सकते हैं।

क्या संसद और विधानमंडलों में पूरी तरह 'शून्य' हो जाएगी बसपा?

इस राज्यसभा चुनाव का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक झटका मायावती की बहुजन समाज पार्टी (BSP) को लगने जा रहा है। बसपा के एकमात्र राज्यसभा सांसद रामजी गौतम का कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में बसपा का खाता नहीं खुला था और पार्टी शून्य पर सिमट गई थी। 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पार्टी का केवल एक विधायक (उमाशंकर सिंह) जीता था, जिनके निधन के बाद विधानसभा में भी बसपा का प्रतिनिधित्व शून्य हो गया। उत्तर प्रदेश विधान परिषद में भी पार्टी का कोई सदस्य नहीं है। राज्यसभा की एक सीट के लिए 37 विधायकों के वोट चाहिए, लेकिन विधानसभा में एक भी विधायक न होने और किसी अन्य दल के समर्थन की गुंजाइश न होने के कारण बसपा अपनी यह सीट गंवा देगी। चार दशक के इतिहास में यह पहला मौका होगा जब संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) तथा उत्तर प्रदेश के दोनों सदनों (विधानसभा और विधान परिषद) में बहुजन समाज पार्टी का एक भी जनप्रतिनिधि नहीं बचेगा।

किन 10 प्रमुख राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल हो रहा है पूरा

इस चुनाव के तहत खाली हो रही 10 सीटों में कई दिग्गज चेहरे शामिल हैं। भाजपा कोटे से केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह, पूर्व डीजीपी बृजलाल, राज्यसभा के उपनेता नीरज शेखर, गीता शाक्य, सीमा द्विवेदी, बीएल वर्मा और दिनेश शर्मा का कार्यकाल पूरा हो रहा है। वहीं समाजवादी पार्टी से पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार प्रोफेसर रामगोपाल यादव और बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक रामजी गौतम की सदस्यता भी 25 नवंबर को समाप्त हो रही है।