जेल में बंद इमरान खान की तीनों बहनें गिरफ्तार, 27 सितंबर के इस्लामाबाद मार्च से पहले सरकार का बड़ा एक्शन
पाकिस्तान की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। रावलपिंडी की उच्च सुरक्षा वाली अडियाला जेल में एक साल से अधिक समय से कैद पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान के पूरे परिवार पर शिकंजा कस दिया गया है। लाहौर पुलिस और प्रशासन ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए इमरान खान की तीनों बहनों—अलीमा खान, डॉ. उजमा खान और नूरीन नियाजी को हिरासत में ले लिया है। इन तीनों को पंजाब मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर (MPO) ऑर्डिनेंस की धारा 3 के तहत 30 दिनों की एहतियातन हिरासत में भेजकर लाहौर की कुख्यात कोट लखपत जेल में शिफ्ट कर दिया गया है। इमरान खान की बहनों की इस अचानक गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मच गया है।
27 सितंबर के 'इस्लामाबाद मार्च' से पहले सरकार की घेराबंदी
पाकिस्तान में पिछले कुछ महीनों से इमरान खान की पार्टी पीटीआई लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए है। पार्टी ने इमरान खान की तत्काल रिहाई, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संविधान की सर्वोच्चता की मांग को लेकर 27 सितंबर को इस्लामाबाद तक एक राष्ट्रव्यापी विरोध मार्च और 'लॉन्ग मार्च' का ऐलान किया है।
इस प्रस्तावित शक्ति प्रदर्शन से शहबाज शरीफ सरकार और सैन्य प्रतिष्ठान (एस्टेबलिशमेंट) पूरी तरह बैकफुट पर दिखाई दे रहे हैं। सरकार को आशंका है कि अगर पीटीआई कार्यकर्ता राजधानी इस्लामाबाद में दाखिल हो गए, तो कानून-व्यवस्था की स्थिति बेकाबू हो सकती है। आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी ने कड़ा रुख अपनाते हुए पहले ही चेतावनी दी थी कि किसी भी सूरत में इस्लामाबाद की सड़कों, राजमार्गों या टोल प्लाजा पर कब्जा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसी मार्च को विफल करने और भीड़ को जुटने से रोकने के लिए पुलिस ने सीधे इमरान खान के परिवार के प्रमुख चेहरों को निशाना बनाना शुरू किया है।
अलीमा, उजमा और नूरीन की गिरफ्तारी: आदेश में क्या आरोप लगाए गए?
लाहौर के डिप्टी कमिश्नर द्वारा जारी हिरासत आदेश में दावा किया गया है कि इमरान खान की बहनें सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था के लिए खतरा बन गई थीं। आदेश में आरोप लगाया गया है कि:
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ये तीनों बहनें 9 मई 2023 की हिंसा और विरोध प्रदर्शनों में कार्यकर्ताओं को भड़काने में शामिल रही थीं।
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वे सोशल मीडिया और सार्वजनिक बैठकों के जरिए कार्यकर्ताओं को गोलबंद कर रही थीं और सरकार तथा राज्य के शीर्ष संस्थानों (सेना) के खिलाफ भड़काऊ नारेबाजी व माहौल तैयार कर रही थीं।
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प्रशासन ने कहा कि यदि उन्हें सार्वजनिक स्थानों पर स्वतंत्र घूमने दिया गया, तो इससे अमन-चैन और कानून-व्यवस्था को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
अलीमा खान को 20 सितंबर को उनके घर से हिरासत में लिया गया था, जबकि अगले ही दिन डॉ. उजमा खान और नूरीन नियाजी को भी बख्तरबंद गाड़ियों में उठाकर अज्ञात स्थान पर ले जाया गया और बाद में कोट लखपत जेल भेजा गया।
राजनीतिक पदों पर नहीं थीं बहनें, फिर क्यों बनीं सरकार का निशाना?
इमरान खान की बहनें सक्रिय राजनीति में पीटीआई के किसी आधिकारिक पद पर नहीं हैं। अलीमा खान एक टेक्सटाइल उद्यमी हैं और प्रतिष्ठित शौकत खानम मेमोरियल ट्रस्ट के बोर्ड में शामिल हैं, जबकि डॉ. उजमा खान पेशे से डॉक्टर/सर्जन हैं।
हालांकि, अगस्त 2023 में इमरान खान के जेल जाने और उनकी पत्नी बुशरा बीबी के भी जेल में होने के बाद, अलीमा खान ही परिवार और पार्टी के बीच सबसे बड़ा संपर्क सूत्र (Voice) बनकर उभरी थीं। जेल में इमरान से मुलाकात के बाद वे मीडिया और समर्थकों के सामने इमरान का संदेश पहुंचाती थीं, उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर आवाज़ उठाती थीं और सेना व सरकार की नीतियों की तीखी आलोचना करती थीं। सरकार को लगा कि अगर बहनों को जेल में डाल दिया जाए, तो इमरान खान और उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट जाएगा और 27 सितंबर के मार्च की दिशा भटक जाएगी।
इमरान खान के परिवार और पीटीआई का तीखा पलटवार: 'हिटलर जैसी क्रूरता'
इस कार्रवाई के बाद इमरान खान के बेटों और पीटीआई नेताओं ने सरकार और सैन्य प्रतिष्ठान के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। लंदन में रह रहे इमरान खान के बेटे कासिम खान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा कि महिलाओं और परिजनों को इस तरह उठाना अमानवीयता और आपराधिक बर्ताव की पराकाष्ठा है। पीटीआई नेताओं ने इसे राजनीतिक बदले की भावना और मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन करार दिया है।
पार्टी के पूर्व अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और पश्चिमी देशों की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए इसकी तुलना 'हिटलर के दौर की तानाशाही' से की है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का भी कहना है कि राजनीतिक विरोध को कुचलने के लिए घर की महिलाओं को निशाना बनाना पाकिस्तान के इतिहास का एक बेहद शर्मनाक और काला अध्याय है।
इमरान के स्वास्थ्य पर भी मंडरा रहे सवाल, अदालत पहुंचा मामला
इस बीच जेल में 73 वर्षीय इमरान खान की तबीयत को लेकर भी चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। उनकी आंख की समस्या और समुचित इलाज न मिलने को लेकर परिवार लगातार न्यायिक गुहार लगा रहा है। बहनों की गिरफ्तारी के खिलाफ वकीलों ने लाहौर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और एमपीओ आदेश को असंवैधानिक बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की है।
कुल मिलाकर, पाकिस्तान इस समय भयंकर राजनीतिक टकराव के मुहाने पर खड़ा है। एक तरफ सेना समर्थित शहबाज सरकार किसी भी हाल में पीटीआई के लॉन्ग मार्च को कुचलना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ इमरान खान के परिवार पर हो रही इस कठोर कार्रवाई ने उनके समर्थकों में गुस्से की आग और भड़का दी है। आने वाले दिनों में 27 सितंबर के प्रस्तावित मार्च को लेकर पाकिस्तान की सड़कों पर भारी टकराव और सियासी अराजकता देखने को मिल सकती है।