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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण एक बार फिर राज्य की सियासत का केंद्र बनने जा रही है। आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के बीच धामी सरकार इस बार के बजट सत्र को केवल एक संवैधानिक औपचारिकता नहीं, बल्कि विकास के 'महा-रोडमैप' के रूप में देख रही है। सूत्रों की मानें तो चुनावी साल की संवेदनशीलता और पहाड़ के विकास के एजेंडे को देखते हुए इस सत्र की अवधि को पांच दिन से बढ़ाकर आगे विस्तारित किया जा सकता है।

चुनावी साल में 'पहाड़' पर नजर, सरकार साधेगी एक तीर से दो निशाने

राज्य आंदोलनकारियों की भावनाओं के केंद्र गैरसैंण में आयोजित हो रहा यह सत्र भाजपा सरकार के लिए बेहद अहम है। अगले वर्ष की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले यह सरकार का पांचवां और सबसे महत्वपूर्ण बजट है। सरकार की रणनीति साफ है कि गैरसैंण की धरती से पहाड़ के चहुंमुखी विकास का खाका खींचकर जनता के बीच एक मजबूत संदेश भेजा जाए। सत्र की अवधि बढ़ने से जहां सरकार को अपनी उपलब्धियां गिनाने का पर्याप्त समय मिलेगा, वहीं विपक्ष के उस पुराने आरोप की धार भी कुंद हो जाएगी जिसमें सत्र को छोटा रखने की शिकायत की जाती रही है।

यूसीसी और विकास के संकल्प के साथ पेश होगा ऐतिहासिक बजट

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार उत्तराखंड को देश के अग्रणी राज्यों में शुमार करने का संकल्प ले चुकी है। बीते वर्षों में समान नागरिक संहिता (UCC) जैसे ऐतिहासिक निर्णयों को जमीन पर उतारने के बाद, अब नजरें इस बजट पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि इस बजट में 'श्रेष्ठ उत्तराखंड' के विजन को पूरा करने के लिए बुनियादी ढांचे, रोजगार और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी बड़ी घोषणाएं हो सकती हैं। सदन के भीतर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राज्य के ज्वलंत मुद्दों पर तीखी लेकिन सारगर्भित चर्चा होने की पूरी उम्मीद है।

कार्यमंत्रणा समिति की मुहर का इंतजार, बढ़ सकती हैं सदन की बैठकें

वर्तमान कार्यक्रम के अनुसार सत्र की अवधि पांच दिन निर्धारित है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इसे बढ़ाया जाना लगभग तय है। हालांकि, अंतिम निर्णय विधानसभा की कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में लिया जाएगा। सरकार चाहती है कि बजट सत्र के दौरान न केवल वित्तीय प्रावधानों पर बात हो, बल्कि जनहित से जुड़े उन तमाम विषयों पर चर्चा हो जिन्हें चुनावी समर में मुद्दा बनाया जा सकता है। ऐसे में गैरसैंण का यह सत्र आने वाले दिनों में उत्तराखंड की राजनीति की नई दिशा तय करेगा।