Prabhat Vaibhav,Digital Desk : देवभूमि उत्तराखंड में मौसम ने एक बार फिर करवट बदली है और मार्च के महीने में दिसंबर जैसी ठंड का एहसास होने लगा है। शुक्रवार रात से शुरू हुआ बारिश का सिलसिला शनिवार सुबह तक जारी रहा, जिससे पूरे प्रदेश में तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। मैदान से लेकर पहाड़ तक बादलों के जमकर बरसने के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। राजधानी देहरादून की बात करें तो यहाँ के अधिकतम तापमान में रिकॉर्ड 11 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है, जिसने लोगों को दोबारा गर्म कपड़े निकालने पर मजबूर कर दिया है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए भी प्रदेश के कई हिस्सों में 'येलो अलर्ट' जारी किया है।
दून समेत मैदानी इलाकों में बारिश से ठिठुरन बढ़ी
राजधानी देहरादून समेत हरिद्वार, रुड़की और उधमसिंह नगर के मैदानी क्षेत्रों में शुक्रवार देर रात से ही मूसलाधार बारिश का दौर शुरू हो गया। देहरादून में पारा गिरने से मार्च की गर्मी अचानक गायब हो गई और फिजाओं में ठिठुरन बढ़ गई है। तापमान में आई इस अचानक गिरावट के कारण दून का अधिकतम तापमान सामान्य से काफी नीचे चला गया है। शहर के निचले इलाकों में जलभराव की समस्या भी देखने को मिली है, जबकि ठंडी हवाओं ने दोपहिया वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने के कारण मौसम का यह मिजाज बदला है।
ऊंचे पहाड़ों पर बर्फबारी, चारधाम यात्रा मार्गों पर बढ़ी सतर्कता
मैदानी इलाकों में जहाँ बारिश हो रही है, वहीं बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की ऊंची चोटियों पर ताजा बर्फबारी की भी सूचना है। पहाड़ों में हो रही इस बारिश और बर्फबारी का सीधा असर मैदानी इलाकों के तापमान पर पड़ रहा है। चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में कड़ाके की ठंड वापस लौट आई है। प्रशासन ने पहाड़ी मार्गों पर यात्रा करने वाले यात्रियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है, क्योंकि बारिश के कारण भूस्खलन (Landslide) और रास्तों पर फिसलन का खतरा बढ़ गया है। सीमांत जनपदों में कड़ाके की ठंड के बीच जनजीवन पूरी तरह घरों में सिमट गया है।
किसानों की चिंता बढ़ी, ओलावृष्टि का भी साया
मौसम के इस बदले मिजाज ने उत्तराखंड के किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। वर्तमान में गेहूं और सरसों की फसल कटाई के कगार पर है, ऐसे में तेज बारिश और कुछ स्थानों पर हुई ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है। विशेषकर बागवानी से जुड़े किसान, जो सेब और आड़ू के बागानों में नई कोपलों का इंतजार कर रहे थे, उनके लिए यह ओलावृष्टि काल बनकर आई है। कृषि विभाग ने जिलाधिकारियों को नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए हैं। मौसम विभाग के अनुसार, अभी आने वाले एक-दो दिनों तक बादलों की आवाजाही बनी रहेगी, जिससे तापमान में और गिरावट संभव है।
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