एम्स ऋषिकेश में आरक्षण और रोस्टर सिस्टम को लेकर भड़का विवाद
देवभूमि उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS Rishikesh) से एक बड़ा प्रशासनिक विवाद और विरोध प्रदर्शन की खबर सामने आई है। अस्पताल में पदोन्नति और नियुक्तियों के दौरान संवैधानिक रोस्टर प्रणाली (Roster System) तथा आरक्षण नियमों (Reservation Policy) का समुचित पालन न किए जाने का गंभीर आरोप लगाते हुए नर्सिंग अधिकारियों और कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। संस्थान परिसर में एकत्रित हुए आक्रोशित कर्मचारियों का कहना है कि प्रशासन की हीलाहवाली के कारण आरक्षित वर्गों के अधिकारों का हनन हो रहा है और योग्य कर्मियों को उनके वाजिब हक से वंचित किया जा रहा है। इस मामले को लेकर कर्मचारियों में भारी नाराजगी व्याप्त है और उन्होंने सीधे तौर पर एम्स प्रबंधन के खिलाफ हुंकार भर दी है।
आखिर क्या है रोस्टर प्रणाली का विवाद और कर्मचारियों के असंतोष की मुख्य वजह?
नर्सिंग अधिकारियों और एसोसिएशन के प्रतिनिधियों का स्पष्ट कहना है कि केंद्र सरकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) व स्वास्थ्य मंत्रालय के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद एम्स ऋषिकेश प्रशासन नियुक्तियों और प्रमोशन की प्रक्रियाओं में बिंदुवार रोस्टर व्यवस्था को लागू करने में आनाकानी कर रहा है। नियमानुसार, किसी भी केंद्रीय संस्थान में खाली पदों को भरते समय अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए तय रोस्टर पॉइंट्स का निष्पक्षता से पालन किया जाना अनिवार्य है। लेकिन आरोप है कि वर्तमान में बिना किसी पारदर्शी रोस्टर सूची के पदों को भरा जा रहा है, जिससे आरक्षित श्रेणी के कई वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारियों की पदोन्नति लटक गई है।
एम्स प्रशासन को सौंपा ज्ञापन, मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की दी सीधी चेतावनी
अपनी मांगों के समर्थन में नर्सिंग अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के जरिए चेतावनी दी गई है कि यदि संस्थान प्रशासन ने तुरंत प्रभाव से रोस्टर प्रणाली में सुधार नहीं किया और आरक्षण के मानकों को पारदर्शी तरीके से लागू करने की समयबद्ध घोषणा नहीं की, तो कर्मचारी शांत नहीं बैठेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रथम चरण में सांकेतिक विरोध प्रदर्शन के बाद यदि प्रशासन का रवैया नहीं बदला, तो वे कार्य बहिष्कार करने और व्यापक स्तर पर धरने पर बैठने के लिए बाध्य होंगे। नर्सिंग स्टाफ द्वारा आंदोलन की चेतावनी दिए जाने से अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर विपरीत असर पड़ने की आशंका से प्रबंधन में हड़कंप मच गया है।
मरीजों की सेवाओं पर पड़ सकता है असर, प्रशासन की चुप्पी से गहराया गतिरोध
एम्स ऋषिकेश केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों जैसे हिमाचल प्रदेश, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा से आने वाले हजारों गंभीर मरीजों के इलाज का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में यदि नर्सिंग अधिकारियों का यह विवाद जल्द नहीं सुलझा और वे हड़ताल या कार्य बहिष्कार की राह पर बढ़ते हैं, तो इसका सीधा खामियाजा दूर-दराज से आने वाले बेबस मरीजों को भुगतना पड़ सकता है। हालांकि, कर्मचारियों का कहना है कि वे मरीजों की सेवा में कोई व्यवधान नहीं डालना चाहते, लेकिन जब उनके संवैधानिक अधिकारों और पेशेवर आत्मसम्मान की बात आएगी, तो संघर्ष के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। फिलहाल एम्स प्रशासन के आला अधिकारी मामले को शांत कराने और कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता की टेबल पर आने का प्रयास कर रहे हैं।