UNGA में 'पाकिस्तान जिंदाबाद' के नारे लगवाने पर घिरे शहबाज शरीफ
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के वैश्विक मंच पर अपनी कूटनीति का ढिंढोरा पीटने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ एक बार फिर अपनी ही हरकतों के कारण दुनिया भर में हास्य और आलोचना का केंद्र बन चुके हैं। यूएनजीए के इस प्रतिष्ठित मंच पर अपने संबोधन के दौरान या उसके आसपास 'पाकिस्तान जिंदाबाद' के नारे लगवाए जाने का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, वैसे ही अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई। इस पूरे घटनाक्रम पर खुद पाकिस्तान के एक पूर्व वरिष्ठ राजनयिक ने खुला तंज कसते हुए शहबाज शरीफ की कूटनीतिक सूझबूझ और देश की साख पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आलोचकों और जानकारों का कहना है कि वैश्विक मंचों का इस्तेमाल इस तरह की संकीर्ण राजनीतिक वाहवाही और प्रायोजित नारों के लिए करना न केवल कूटनीतिक मर्यादा के खिलाफ है, बल्कि यह पाकिस्तान की पहले से ही धूमिल हो चुकी अंतरराष्ट्रीय छवि को और अधिक गहरा आघात पहुंचा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक मंच पर भाषण और प्रायोजित नारों का यह नाटकीय खेल
संयुक्त राष्ट्र महासभा का वार्षिक सत्र दुनिया भर के राष्ट्रध्यक्षों के लिए वैश्विक शांति, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक विकास और आपसी सहयोग जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा करने का सबसे बड़ा और पवित्र मंच माना जाता है। लेकिन इसके विपरीत, पाकिस्तानी हुक्मरानों की आदत रही है कि वे ऐसे मंचों का उपयोग भी अपने घरेलू राजनीतिक नैरेटिव को सेट करने और अपनी जनता को दिखाने के लिए करने से बाज नहीं आते। शहबाज शरीफ के इस दौरे के दौरान जिस प्रकार से सुनियोजित तरीके से नारेबाजी का माहौल तैयार किया गया और उसे प्रचारित किया गया, उसने वहां मौजूद अन्य देशों के राजनयिकों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इस तरह की ओछी हरकतों से एक तरफ जहां वैश्विक स्तर पर देश की फजीहत होती है, वहीं दूसरी तरफ गंभीर कूटनीतिक बैठकों में पाकिस्तान की बात को कोई भी देश या नेता गंभीरता से लेने को तैयार नहीं होता है।
पूर्व पाकिस्तानी राजनयिक का तीखा तंज और सोशल मीडिया पर छिड़ी तीखी बहस
जब अपने ही देश के एक पूर्व प्रतिष्ठित राजनयिक ने शहबाज शरीफ की इस हरकत पर खुलकर तंज कसा और इसे बचकाना करार दिया, तो पाकिस्तान के भीतर और बाहर सियासी भूचाल आ गया। पूर्व राजनयिक का कहना था कि संयुक्त राष्ट्र जैसे संप्रभु और गंभीर मंच पर इस तरह की ओछी बयानबाजी और नारेबाज़ी देश के गिरते हुए राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर का स्पष्ट प्रमाण है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी इस वीडियो और उस पर आए प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है, जहां दुनिया भर के यूजर्स पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली और वैश्विक मंचों पर उसकी गिड़गिड़ाने की पुरानी आदत का मज़ाक उड़ा रहे हैं। नेटिज़न्स का कहना है कि देश में जनता भले ही भुखमरी, महंगाई और बिजली संकट से जूझ रही हो, लेकिन हुक्मरानों को अपनी झूठी वाहवाही लूटने के लिए ऐसे ड्रामे करने से फुर्सत नहीं मिल रही है।
पाकिस्तान की डूबती अर्थव्यवस्था और संयुक्त राष्ट्र में गिड़गिड़ाने की पुरानी फितरत
यह कोई पहला मौका नहीं है जब पाकिस्तान के किसी प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र के मंच का इस्तेमाल अपनी घरेलू राजनीति चमकाने या दुनिया के सामने भीख मांगने के लिए किया हो। एक तरफ देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय कर्ज के दलदल में धंसी हुई है, विदेशी मुद्रा भंडार खाली होने की कगार पर है, और आम नागरिक रोजमर्रा की बुनियादी जरूरतों के लिए तरस रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ शासक वर्ग इन दिखावटी नारों और दौरों पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और अन्य वैश्विक वित्तीय संस्थानों के सामने हाथ फैलाने वाला देश जब यूएनजीए जैसे मंचों पर इस प्रकार के बचकाने ढोंग रचता है, तो दुनिया के विकसित देश भी उसकी इस दोहरी नीति को बहुत अच्छी तरह समझ जाते हैं। यही वजह है कि आज वैश्विक कूटनीति में पाकिस्तान की बातों को केवल औपचारिकता से ज्यादा कुछ नहीं समझा जाता है।
कूटनीतिक विफलता का यह नया अध्याय और देश के भविष्य पर मंडराता गंभीर संकट
शहबाज शरीफ का यह पूरा यूएनजीए दौरा और उसके बाद सामने आए विवाद इस बात का स्पष्ट आईना हैं कि किस तरह पाकिस्तान का नेतृत्व अपने आंतरिक राजनीतिक संकटों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के हथकंडों का सहारा लेता है। दुनिया तेजी से तकनीक, नवाचार और आर्थिक सुदृढ़ीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही है, जबकि पाकिस्तान आज भी उन्हीं पुरानी और खोखली बयानबाजियों में उलझा हुआ है। इस प्रकार की घटनाओं से न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का अपमान होता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक बहुत ही नकारात्मक संदेश जाता है। जब तक देश के नेता अपनी तुच्छ राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए ऐसे वैश्विक मंचों का दुरुपयोग करना बंद नहीं करेंगे, तब तक दुनिया के नक्शे पर पाकिस्तान की विश्वसनीयता का ग्राफ यूं ही नीचे गिरता रहेगा।