Prabhat Vaibhav, Digital Desk : बिहार की आर्थिक तस्वीर बदलने और युवाओं को हुनरमंद बनाने की दिशा में मंगलवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय एमएसएमई (MSME) मंत्री जीतन राम मांझी ने बिहटा में सवा दो सौ करोड़ रुपये की लागत से नवनिर्मित टेक्नोलॉजी सेंटर और राज्य के चार जिलों (मुजफ्फरपुर, रोहतास, दरभंगा और मुंगेर) में एक्सटेंशन सेंटरों का भव्य उद्घाटन किया। इस पहल का सीधा उद्देश्य बिहार के युवाओं को 'जॉब सीकर' के बजाय 'जॉब क्रिएटर' बनाना है।
तकनीकी शिक्षा अब सबके लिए: मात्र ₹10 में इंजीनियरिंग
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण को लेकर सरकार की दूरगामी सोच साझा की। उन्होंने कहा कि अब बिहार के युवाओं को पढ़ाई या ट्रेनिंग के लिए बाहर जाने की मजबूरी नहीं होगी।
सस्ती शिक्षा: राज्य सरकार इंजीनियरिंग की पढ़ाई मात्र 10 रुपये और डिप्लोमा कोर्स 5 रुपये में उपलब्ध करा रही है।
बुनियादी ढांचा: हर जिले में मेडिकल और डिग्री कॉलेज के साथ-साथ 533 प्रखंडों में मॉडल स्कूल खोले जा रहे हैं।
बड़ा लक्ष्य: सरकार ने बिहार की 14 करोड़ आबादी में से कम से कम 1 करोड़ युवाओं को सीधे रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा है।
एमएसएमई: भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने मगही भाषा में जनता का अभिवादन करते हुए एमएसएमई सेक्टर की अहमियत बताई। उन्होंने कहा कि देश के कुल निर्यात में इस क्षेत्र का योगदान 45.73 प्रतिशत है।
ग्रामीण सशक्तिकरण: बिहटा का यह केंद्र 15 एकड़ में फैला है, जहाँ हजारों युवाओं को अत्याधुनिक मशीनों और तकनीकों का मुफ्त प्रशिक्षण मिलेगा।
विश्वकर्मा योजना का लाभ: पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत अब तक 13 लाख लोगों को लाभ मिल चुका है और 2028 तक 30 लाख लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य है। लाभार्थियों को अपना काम शुरू करने के लिए ₹15,000 की टूलकिट भी दी जा रही है।
बिहटा टेक्नोलॉजी सेंटर की खास बातें:
लागत: बिहटा केंद्र पर ₹171 करोड़ और चार एक्सटेंशन सेंटरों पर ₹40 करोड़ खर्च किए गए हैं।
सुविधाएं: स्टार्टअप कल्चर को बढ़ावा देने के लिए छात्रों और उद्यमियों को यहाँ तकनीकी परामर्श और इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा।
एक्सटेंशन सेंटर: मुजफ्फरपुर, रोहतास, दरभंगा और मुंगेर के केंद्रों से क्षेत्रीय स्तर पर कौशल विकास को गति मिलेगी।
चौथी औद्योगिक क्रांति की तैयारी
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने बताया कि भारत वर्तमान में चौथी औद्योगिक क्रांति के दौर में है, जहाँ 65 प्रतिशत आबादी युवाओं की है। एमएसएमई विकास सचिव डॉ. रजनीश कुमार और प्रत्यय अमृत के अनुसार, इस सेक्टर के माध्यम से देश में अब तक लगभग 33 करोड़ लोग अपनी आजीविका चला रहे हैं। बिहार में इन केंद्रों की शुरुआत से स्थानीय उद्योगों को न केवल कुशल श्रमबल मिलेगा, बल्कि छोटे उद्यमियों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने की शक्ति भी मिलेगी।




