Prabhat Vaibhav,Digital Desk : चंडीगढ़ में 29 जनवरी को होने वाले मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव से ठीक एक दिन पहले सियासी माहौल गर्म हो गया है। सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने मेयर के प्रत्यक्ष चुनाव और पांच वर्ष के निश्चित कार्यकाल की मांग को एक बार फिर मजबूती से उठाया है।
तिवारी ने कहा कि वर्ष 1996 से अब तक चंडीगढ़ को लगभग 30 मेयर, 30 सीनियर डिप्टी मेयर और 30 डिप्टी मेयर मिल चुके हैं। यानी तीन दशकों में करीब 90 लोग इन पदों पर आसीन हुए, लेकिन इसके बावजूद नगर निगम की स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं दिखता। उनके अनुसार समस्या व्यक्तियों की नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की है।
अधिकार हैं नाम मात्र के
मनीष तिवारी ने कहा कि मौजूदा प्रणाली में मेयर और डिप्टी मेयर संवैधानिक रूप से कमजोर हैं। उनके पास न तो पर्याप्त अधिकार हैं और न ही लंबा कार्यकाल, जिससे वे कोई ठोस नीतिगत फैसला ले सकें। उन्होंने साफ कहा कि अगर व्यवस्था प्रभावी होती, तो चंडीगढ़ नगर निगम को आज लगातार वित्तीय संकट और प्रशासनिक अस्थिरता का सामना नहीं करना पड़ता।
प्रत्यक्ष चुनाव ही समाधान
सांसद तिवारी के अनुसार इस समस्या का एकमात्र व्यावहारिक समाधान यह है कि चंडीगढ़ के सभी मतदाता सीधे तौर पर पांच वर्षों के लिए मेयर का चुनाव करें। साथ ही मेयर को ऐसे अधिकार दिए जाएं, जिससे वह शहर के विकास, वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक फैसलों में निर्णायक भूमिका निभा सके।
संसद में भी उठाया मुद्दा
उन्होंने बताया कि इसी सोच के तहत 5 दिसंबर 2025 को उन्होंने लोकसभा में एक निजी सदस्य विधेयक पेश किया था। इस विधेयक में मेयर और डिप्टी मेयरों के लिए पांच वर्ष का कार्यकाल और उनके दायित्वों के निर्वहन हेतु आवश्यक अधिकार सुनिश्चित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
दलगत राजनीति से ऊपर उठने की अपील
तिवारी ने सभी राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे इस मुद्दे को दलगत राजनीति से अलग रखकर देखें। उन्होंने कहा कि मौजूदा संसदीय सत्र के दौरान वे इस विषय को आगे बढ़ाने के लिए सभी उपलब्ध संसदीय विकल्पों पर विचार करेंगे।
नहीं बदली व्यवस्था तो पद रह जाएंगे औपचारिक
अंत में उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि मौजूदा ढांचा यूं ही चलता रहा, तो मेयर और डिप्टी मेयर के पद केवल औपचारिक या सजावटी बनकर रह जाएंगे और शहर की असल समस्याएं जस की तस बनी रहेंगी।




