img

Prabhat Vaibhav,Digital Desk : ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी भीषण महायुद्ध (Iran-Israel War 2026) के बीच खाड़ी देशों में फंसे हजारों भारतीयों की सुरक्षा को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर 'प्रत्यावर्तन योजना' (Repatriation Plan) का पूरा ब्यौरा मांगा है। अदालत ने स्पष्ट रूप से पूछा है कि हवाई क्षेत्र (Airspace) बंद होने और युद्ध के बीच फंसे अपने नागरिकों को वापस लाने के लिए सरकार के पास क्या 'ठोस रणनीति' है।

"केवल आश्वासन नहीं, एक्शन चाहिए": हाई कोर्ट की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने टिप्पणी की कि खाड़ी क्षेत्र में फंसे लोगों के परिवारों में भारी चिंता और अनिश्चितता का माहौल है। अदालत ने कहा, "यह केवल कूटनीति का विषय नहीं, बल्कि जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार (Article 21) का सवाल है।" हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार के वकील से पूछा कि क्या 'वंदे भारत' की तर्ज पर कोई नया रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू करने की तैयारी है? अदालत ने विशेष रूप से उन पंजाबियों का मुद्दा उठाया जो दुबई और दोहा हवाई अड्डों पर कई दिनों से बिना किसी सहायता के फंसे हुए हैं।

पंजाब सरकार ने भी जताई चिंता, मुख्यमंत्री ने माँगी मदद

इस कानूनी कार्रवाई के बीच, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Civil Aviation Ministry) को पत्र लिखकर केंद्र से तुरंत विशेष 'रेस्क्यू फ्लाइट्स' चलाने की मांग की है। राज्य सरकार ने दावा किया है कि अकेले पंजाब के ही हजारों लोग इस समय खाड़ी के अलग-अलग हिस्सों में युद्ध के कारण उत्पन्न हुए विमानन संकट में फंसे हुए हैं। पंजाब सरकार ने केंद्र को उन सभी नागरिकों की सूची और संपर्क नंबर भी सौंपे हैं, जिन्होंने राज्य के हेल्पलाइन नंबरों पर मदद के लिए कॉल किया था।

सरकार का पक्ष: "एयरस्पेस बंद होना सबसे बड़ी चुनौती"

केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए एएसजी (ASG) ने अदालत को बताया कि सरकार स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है और 'कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी' (CCS) की बैठकों में लगातार इवेकुएशन विकल्पों पर चर्चा हो रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ईरान, इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) सहित कई देशों के हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण विमान भेजना फिलहाल जोखिम भरा है। सरकार ने अदालत को बताया कि ओमान और कुवैत जैसे वैकल्पिक रास्तों के जरिए भारतीयों को निकालने की संभावना तलाशी जा रही है।

12 मार्च तक मांगा विस्तृत जवाब

हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को आगामी 12 मार्च 2026 तक एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसमें सरकार को यह बताना होगा:

अब तक कितने भारतीयों ने दूतावासों में पंजीकरण कराया है?

क्या सुरक्षित गलियारा (Safe Passage) बनाने के लिए ईरानी और अमेरिकी अधिकारियों से बातचीत हुई है?

क्या उन लोगों के लिए भोजन और अस्थायी आवास की व्यवस्था की गई है जो हवाई अड्डों पर फंसे हैं?