Prabhat Vaibhav,Digital Desk : भारतीय चुनाव आयोग द्वारा चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के बाद देश की मतदाता सूचियों में एक बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी और सटीक बनाने के उद्देश्य से की गई इस कवायद में 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों की संयुक्त मतदाता सूची से लगभग 6.08 करोड़ (60.8 मिलियन) नाम हटा दिए गए हैं। इस छंटनी के बाद इन राज्यों में मतदाताओं की कुल संख्या 51 करोड़ से घटकर अब 44.92 करोड़ रह गई है।
उत्तर प्रदेश और गुजरात में सबसे बड़ी कटौती
मतदाता सूची के इस दूसरे चरण के संशोधन में उत्तर प्रदेश और गुजरात में सबसे चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। प्रतिशत के लिहाज से देखें तो गुजरात में सबसे अधिक 13.40% नाम हटाए गए हैं, जबकि उत्तर प्रदेश 13.24% की कमी के साथ दूसरे स्थान पर है। उत्तर प्रदेश में चुनाव से पहले मतदाताओं की संख्या 15.44 करोड़ थी, जो अब घटकर 13.40 करोड़ रह गई है। हालांकि, गौर करने वाली बात यह है कि अंतिम सूची में मसौदा सूची की तुलना में 84.28 लाख नए मतदाता भी जुड़े हैं।
यूपी के इन जिलों में चला चुनाव आयोग का 'चाबुक'
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मतदाताओं की संख्या में सबसे भारी गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार, लखनऊ में कुल मतदाताओं में से 22.89% की कमी आई है। राज्य के प्रमुख जिलों में हटाए गए नामों का विवरण इस प्रकार है:
लखनऊ: 9,14,185 नाम हटाए गए
प्रयागराज: 8,26,885 नाम हटाए गए
कानपुर: 6,87,201 नाम हटाए गए
आगरा: 6,37,653 नाम हटाए गए
गाजियाबाद: 5,74,478 नाम हटाए गए
विधानसभा क्षेत्रों की बात करें तो साहिबाबाद से सबसे ज्यादा 3.16 लाख और नोएडा से 1.83 लाख नाम काटे गए हैं।
किन-किन राज्यों की सूची हुई अपडेट?
दूसरे चरण की इस प्रक्रिया में कुल 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई है। इनमें उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, राजस्थान, छत्तीसगढ़, केरल, पुडुचेरी, गुजरात, मध्य प्रदेश, गोवा, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप शामिल हैं। बिहार में यह प्रक्रिया पहले ही संपन्न हो चुकी थी।
विभिन्न राज्यों में मतदाताओं की कमी का प्रतिशत कुछ इस प्रकार रहा: छत्तीसगढ़ (11.77%), बंगाल (11.61%), तमिलनाडु (11.55%), गोवा (10.76%), और मध्य प्रदेश (5.97%)।
बाकी राज्यों में कब शुरू होगा संशोधन?
देश के कुल 99 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं में से लगभग 60 करोड़ मतदाताओं का डेटा अब पूरी तरह अपडेट हो चुका है। चुनाव आयोग के अनुसार, शेष 17 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 40 करोड़ मतदाताओं के लिए एसआईआर (SIR) प्रक्रिया इस महीने होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के तुरंत बाद शुरू की जाएगी। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य फर्जी वोटिंग को रोकना और ऐसे मतदाताओं के नाम हटाना है जो या तो स्थानांतरित हो चुके हैं या जिनकी मृत्यु हो चुकी है।




