Prabhat Vaibhav,Digital Desk : हरिद्वार में अर्धकुंभ 2027 की तैयारियाँ अब मुख्य रूप से आस्था पथ (Aastha Path) को शहर की नई पहचान और दिल के रूप में विकसित करने पर केंद्रित हैं। गंगा घाटों से लेकर गलियों तक तीर्थ यात्रियों और श्रद्धालुओं के लिए आस्था पथ को जीवनरेखा जैसा महत्त्व दिया जा रहा है, ताकि लाखों भक्तों के लिए यह स्थल सुगम, सुचारू और आत्मिक रूप से प्रसन्न अनुभव बन सके। यह पथ कुंभ के दौरान लाखों इंसानों का आस्था‑समागम और भी प्रभावशाली बनाने में मदद करेगा।
उत्तराखंड सरकार और प्रशासन धार्मिक, प्रशासनिक और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए सार्वजनिक‑निजी साझेदारी सहित सीएसआर फंड का भी उपयोग कर रहे हैं। तैयारियों में घाटों के आसपास के मार्गों का कायाकल्प, सलाह‑समन्वय केंद्रों का निर्माण और भीड़ प्रबंधन व्यवस्था शामिल है, जिससे कुंभ के दौरान आने वाले तीर्थयात्रियों को सुरक्षित और अनुशासित अनुभव मिल सके।
अर्धकुंभ 2027 के आयोजन को भव्य और दिव्य रूप से कराने पर जोर दिया गया है, जिसमें धार्मिक स्नान तिथियों, शाही अमृत स्नानों और विशेष सभाओं की योजना है। इस आयोजन में लाखों श्रद्धालु गंगा नदी के पवित्र जल में स्नान करने और पुण्य प्राप्ति के अवसरों का लाभ उठाने आते हैं।




