Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच छिड़ा भीषण युद्ध अब भारत की रसोइयों और इकोनॉमी पर भारी पड़ने लगा है। बेंगलुरु के बाद अब मुंबई, पुणे और पंजाब जैसे बड़े राज्यों में भी कमर्शियल एलपीजी (LPG) की भारी किल्लत हो गई है। हालात इतने बेकाबू हो चुके हैं कि देश के कई हिस्सों में रेस्टोरेंट और होटलों ने बोर्ड टांग दिए हैं कि उनके पास खाना बनाने के लिए गैस नहीं बची है।
बेंगलुरु में आज से तालाबांदी, मुंबई-पुणे में भी संकट के बादल
बेंगलुरु होटल्स एसोसिएशन ने अपनी पूर्व घोषणा के अनुसार आज, 10 मार्च से शहर के सभी होटलों को बंद करने का फैसला लागू कर दिया है। एसोसिएशन का कहना है कि कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई अचानक रुकने से उनके पास कारोबार बंद करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। यही स्थिति अब देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में भी देखने को मिल रही है। पुणे में तो संकट इतना गहरा गया है कि एलपीजी की कमी के कारण नगर निगम को कुछ श्मशान घाटों तक को बंद करना पड़ा है।
घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बदले नियम, बुकिंग में 25 दिन का अंतर
गैस की भारी कमी को देखते हुए सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं (Domestic Users) को बचाने के लिए नए कड़े नियम लागू कर दिए हैं। अब आम नागरिक दो सिलेंडरों की रीफिल बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिनों का अंतर रखना होगा, जो पहले 21 दिन था। तेल कंपनियों के अधिकारियों का कहना है कि उनकी पहली प्राथमिकता घरों के चूल्हे जलाए रखना है, जिसके कारण कमर्शियल सप्लाई में भारी कटौती की गई है। युद्ध के डर से आम जनता भी पैनिक बुकिंग कर रही है, जिससे सिस्टम पर दबाव और बढ़ गया है।
खाड़ी देशों से सप्लाई कटी, अमेरिका से मदद आने में लगेंगे 45 दिन
भारत के लिए यह स्थिति बेहद नाजुक है क्योंकि हम अपनी कुल एलपीजी खपत का लगभग दो-तिहाई हिस्सा विदेशों से आयात करते हैं। इसमें से 90 प्रतिशत हिस्सा खाड़ी देशों (Gulf Countries) से आता है, जहां युद्ध के कारण सप्लाई चेन पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। भारत अब अमेरिका जैसे वैकल्पिक देशों की ओर देख रहा है, लेकिन वहां से गैस की खेप पहुंचने में कम से कम 45 दिन का समय लगता है, जबकि खाड़ी देशों से यह काम महज एक हफ्ते में हो जाता था। डेढ़ महीने का यह 'गैप' भारतीय बाजार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
सरकार ने रिफाइनरियों को दिया 'मैक्सिमम प्रोडक्शन' का आदेश
बिगड़ते हालात को देखते हुए केंद्र सरकार ने देश की प्रमुख तेल कंपनियों और रिफाइनरियों को अलर्ट मोड पर डाल दिया है। GAIL और ONGC जैसी दिग्गज कंपनियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे प्राकृतिक गैस की प्रोसेसिंग के दौरान एलपीजी के उत्पादन को अधिकतम स्तर पर ले जाएं। सरकार की कोशिश है कि घरेलू उत्पादन बढ़ाकर कम से कम आवश्यक सेवाओं और घरों की जरूरत पूरी की जा सके, लेकिन होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री के लिए आने वाले कुछ हफ्ते बेहद कठिन होने वाले हैं।




