Prabhat Vaibhav,Digital Desk : 12 जून 2025 को अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया के विमान हादसे ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे के बाद अब जो जानकारियां सामने आ रही हैं, वे न सिर्फ सिस्टम की खामियों को उजागर कर रही हैं, बल्कि पीड़ित परिवारों की तकलीफों को और बढ़ा रही हैं।
शवों की पहचान बनी चुनौती
अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में मृतकों की पहचान का काम बेहद कठिन और धीमी गति से चल रहा है। कई शव बुरी तरह जले हुए हैं या कटे-फटे हालत में हैं, जिससे उन्हें पहचानना लगभग असंभव हो गया है। इसी प्रक्रिया के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया जिसने सबको झकझोर दिया – एक बॉडी बैग में दो अलग-अलग लोगों के सिर पाए गए। यह बेहद गंभीर लापरवाही मानी जा रही है और अब इस वजह से डीएनए परीक्षण की पूरी प्रक्रिया को फिर से शुरू करना पड़ा है।
पीड़ित परिवारों की गुहार
सिविल अस्पताल के मुर्दाघर के बाहर का माहौल बेहद शोकपूर्ण है। अपने परिजनों की पहचान और उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए जुटे परिवार बेहद व्यथित हैं। कई लोग अधिकारियों से निवेदन कर रहे हैं कि उन्हें उनके प्रियजन के पूरे शरीर के अवशेष सौंपे जाएं, न कि अलग-अलग अंग। एक पीड़ित के रिश्तेदार ने साफ शब्दों में कहा कि वे टुकड़ों में नहीं, पूरे पार्थिव शरीर के साथ अंतिम संस्कार करना चाहते हैं। लेकिन अधिकारियों ने साफ कर दिया कि हादसे की गंभीरता के चलते यह संभव नहीं है, जिससे परिवारों की पीड़ा और बढ़ गई है।
शवों की संख्या और पहचान
बी.जे. मेडिकल कॉलेज के अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रजनीश पटेल ने जानकारी दी कि कुल 270 शव अस्पताल लाए गए थे। इनमें से 241 शव लंदन जाने वाली फ्लाइट के यात्रियों और क्रू मेंबर्स के थे, जबकि बाकी कॉलेज हॉस्टल में मौजूद लोगों के थे, जो हादसे का शिकार हुए।
अब तक 32 शवों की डीएनए सैंपलिंग के ज़रिए पहचान हो चुकी है, जिनमें से 12 शव परिजनों को सौंप दिए गए हैं। वहीं 8 अन्य शव ऐसे थे जिनकी पहचान स्पष्ट थी, और डीएनए टेस्ट की जरूरत नहीं पड़ी।
प्रशासन की कोशिशें और चुनौतियाँ
प्रशासन का कहना है कि वे पूरी कोशिश कर रहे हैं कि शवों की पहचान और सुपुर्दगी की प्रक्रिया पूरी सावधानी और संवेदनशीलता से की जाए। लेकिन पहचान की प्रक्रिया में आई गड़बड़ियों ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना होगा कि आगे की प्रक्रिया में कितनी पारदर्शिता और मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाता है।
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