Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में 'काकोरी ट्रेन एक्शन' के अमर शहीदों की प्रतिमाओं को बुलडोजर से गिराए जाने का मामला अब एक बड़े राजनीतिक संग्राम में तब्दील हो गया है। टाउनहाल के सौंदर्यीकरण के नाम पर शहीद राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां और ठाकुर रोशन सिंह की प्रतिमाओं को जिस तरह से क्षतिग्रस्त किया गया, उसने पूरे प्रदेश में आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। समाजवादी पार्टी के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए योगी सरकार पर सीधा हमला बोला है।
सौंदर्यीकरण या शहीदों का अपमान? अखिलेश का तीखा प्रहार
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर पोस्ट करते हुए सरकार की मानसिकता पर सवाल उठाए। उन्होंने कटाक्ष करते हुए लिखा, "अंग्रेजों की गुलामी और मुखबिरी करने वाले शहादत का मोल क्या जानें।" अखिलेश ने आगे कहा कि किसी भी शहर का सौंदर्य कभी भी शहीदों के मान-सम्मान से बड़ा नहीं हो सकता। सौंदर्यीकरण के बहाने अमर बलिदानियों की प्रतिमाओं पर बुलडोजर चलवाना एक 'बीमारू मानसिकता' की निशानी है। सपा प्रमुख ने मांग की है कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो और शहीदों का सम्मान बहाल किया जाए।
क्या है पूरा मामला? टाउनहाल में बुलडोजर का तांडव
शाहजहांपुर के टाउनहाल परिसर में नगर निगम द्वारा सुंदरीकरण का कार्य कराया जा रहा है। इस काम का जिम्मा लखनऊ की कार्यदायी संस्था 'फ्लाई इंफ्रा टेक' को सौंपा गया था। नगर निगम प्रशासन ने काकोरी बलिदानियों की प्रतिमाओं को सुरक्षित रूप से हटाने के निर्देश दिए थे, ताकि वहां निर्माण कार्य हो सके। लेकिन, लापरवाही की हद तब पार हो गई जब फर्म के कर्मचारियों ने क्रेन या मैन्युअल तरीके के बजाय सीधे बुलडोजर से मूर्तियों को गिरा दिया। इस कार्रवाई में तीनों महान क्रांतिकारियों की प्रतिमाएं बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं।
जनता में भारी आक्रोश, प्रशासन के हाथ-पांव फूले
जैसे ही प्रतिमाओं के क्षतिग्रस्त होने की खबर फैली, शाहजहांपुर की जनता और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने टाउनहाल पर धावा बोल दिया। लोगों का कहना है कि यह उन शहीदों का अपमान है जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। भारी विरोध प्रदर्शन को देखते हुए स्थानीय प्रशासन अब बचाव की मुद्रा में है। हालांकि, नगर निगम ने जांच की बात कही है, लेकिन शहीदों के अपमान ने सरकार की 'बुलडोजर नीति' को एक बार फिर कटघरे में खड़ा कर दिया है।
विपक्ष ने बनाया चुनावी मुद्दा
आगामी विधानसभा चुनावों से पहले इस घटना ने विपक्ष को सरकार को घेरने का एक बड़ा मुद्दा दे दिया है। सपा के साथ-साथ अन्य विपक्षी दलों ने भी इसे 'राष्ट्रभक्ति' के नाम पर ढोंग करने वाली सरकार का असली चेहरा बताया है। शाहजहांपुर जो कि बिस्मिल और अशफाक की जन्मस्थली है, वहां इस तरह की घटना ने भावनाओं को बुरी तरह आहत किया है। अब देखना यह है कि क्या योगी सरकार संबंधित फर्म के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई कर इस डैमेज कंट्रोल को संभाल पाती है।




