Prabhat Vaibhav,Digital Desk : ईरान के साथ छिड़े महायुद्ध के बीच सुपरपावर अमेरिका के लिए एक डराने वाली आर्थिक रिपोर्ट सामने आई है। वाशिंगटन स्थित प्रतिष्ठित थिंक टैंक 'सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज' (CSIS) ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के खिलाफ शुरू किए गए 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' (Operation Epic Fury) के शुरुआती 100 घंटों के भीतर ही अमेरिका ने लगभग 3.7 अरब डॉलर (करीब 31,000 करोड़ रुपये) की भारी-भरकम राशि गंवा दी है। यह आंकड़ा केवल सैन्य संचालन का है, जो अमेरिकी खजाने पर पड़ रहे अभूतपूर्व बोझ को दर्शाता है।
हर घंटे 310 करोड़ रुपये की 'बलि', रडार और F-15 जेट्स तबाह
CSIS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस युद्ध में अमेरिका का औसत दैनिक खर्च लगभग 891 मिलियन डॉलर (करीब 7,400 करोड़ रुपये) रहा है। इसका अर्थ यह है कि अमेरिका हर घंटे 310 करोड़ रुपये से अधिक की राशि युद्ध की आग में झोंक रहा है। इस भारी खर्च का एक बड़ा कारण महंगे सैन्य साजो-सामान का नुकसान है। कतर के अल उदेद एयरबेस पर तैनात 1.1 बिलियन डॉलर की कीमत वाला 'अर्ली वार्निंग रडार सिस्टम' पूरी तरह तबाह हो गया है। इसके अलावा, ईरान की जवाबी कार्रवाई में अमेरिका ने अपने तीन अत्याधुनिक F-15E स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान भी खो दिए हैं।
2,000 से ज्यादा मिसाइलें खाक, गोला-बारूद के स्टॉक पर संकट
थिंक टैंक के रक्षा विशेषज्ञों, मार्क कैंसियन और क्रिस पार्क ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि शुरुआती 4 दिनों में ही अमेरिका ने 2,000 से अधिक विभिन्न प्रकार की घातक मिसाइलों और सटीक हथियारों का इस्तेमाल किया है। इन हथियारों के भंडार को दोबारा भरने (Replenishment) के लिए ही पेंटागन को करीब 3.1 अरब डॉलर की अतिरिक्त जरूरत होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह जंग राष्ट्रपति ट्रंप के अनुमान के मुताबिक 4-5 हफ्तों तक खिंची, तो अमेरिका को अपनी सैन्य प्राथमिकताओं और बजट में भारी कटौती करनी पड़ सकती है।
अमेरिकी जनता पर 'महंगाई का बम', तेल की कीमतों में उछाल
युद्ध की इस भारी लागत का सीधा असर अब अमेरिकी जनता की जेब पर भी पड़ने लगा है। खाड़ी क्षेत्र में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के संभावित बंद होने के खतरे से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुँच गई हैं। अमेरिका में ईंधन और बिजली की बढ़ती लागत ने महंगाई को बढ़ावा दिया है। CSIS की रिपोर्ट चेतावनी देती है कि यदि वाशिंगटन ने जल्द ही इस युद्ध का कूटनीतिक समाधान नहीं निकाला, तो यह 'आर्थिक सुनामी' वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ अमेरिकी डॉलर की साख को भी चोट पहुँचा सकती है।




