Prabhat Vaibhav,Digital Desk : मिडिल ईस्ट में जारी 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' (Operation Epic Fury) अब अपने सबसे निर्णायक और घातक चरण में प्रवेश कर गया है। अमेरिका के सबसे खतरनाक और दुनिया के सबसे महंगे युद्धक विमान B-2 स्पिरिट स्टील्थ बॉम्बर (B-2 Spirit Stealth Bomber) की ब्रिटिश सैन्य ठिकानों पर तैनाती ने तेहरान से लेकर मॉस्को तक हड़कंप मचा दिया है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने एक बड़ा नीतिगत बदलाव करते हुए अमेरिकी बॉम्बर्स को RAF फेयरफोर्ड (Fairford) और हिंद महासागर के डिएगो गार्सिया (Diego Garcia) बेस का उपयोग करने की अनुमति दे दी है। इस कदम का सीधा मतलब है कि अब ईरान के परमाणु ठिकानों और 'अंडरग्राउंड मिसाइल सिटीज' पर हमला करना अमेरिका के लिए बेहद आसान और तेज हो जाएगा।
'37 घंटे का सफर' खत्म, अब चंद मिनटों में होगी तबाही
इससे पहले, अमेरिकी B-2 बॉम्बर्स को ईरान पर बमबारी करने के लिए अमेरिका के मिसौरी (Whiteman AFB) से 37 घंटे की नॉन-स्टॉप उड़ान भरनी पड़ रही थी, जिसमें कई बार हवा में ईंधन भरने की जरूरत होती थी। अब ब्रिटिश ठिकानों पर तैनाती से ये बॉम्बर्स कुछ ही समय में ईरानी हवाई क्षेत्र में प्रवेश कर सकेंगे। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह तैनाती ईरान के उन 'हार्डन' (बेहद मजबूत) ठिकानों को निशाना बनाने के लिए की गई है, जिन्हें साधारण मिसाइलें नहीं भेद सकतीं।
'बंकर बस्टर' और MOP: ईरान के पहाड़ों को चीरने की तैयारी
B-2 बॉम्बर की सबसे बड़ी खासियत इसकी 'स्टील्थ' (Stealth) तकनीक है, जो इसे ईरान के रूसी निर्मित S-400 रडार सिस्टम के लिए भी 'अदृश्य' बना देती है। यह विमान 30,000 पाउंड (13,600 किलो) का 'मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर' (MOP) बम ले जाने में सक्षम है, जो जमीन के सैकड़ों फीट नीचे बने कंक्रीट के बंकरों को भी मलबे में तब्दील कर सकता है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, पिछले 72 घंटों में B-2 बॉम्बर्स ने तेहरान के आसपास और अलबोर्ज पहाड़ों में स्थित करीब 200 भूमिगत लक्ष्यों पर सटीक प्रहार किया है।
ब्रिटेन का 'सहयोग' और सुरक्षा जोखिम
ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन हीली ने स्पष्ट किया है कि यह कदम "ईरानी मिसाइल क्षमताओं को नष्ट करने और सहयोगियों की रक्षा" के लिए उठाया गया है। हालांकि, इस फैसले ने ब्रिटेन के लिए सुरक्षा जोखिम भी बढ़ा दिए हैं। हाल ही में साइप्रस स्थित ब्रिटिश बेस RAF एक्रोटिरी (Akrotiri) पर एक संदिग्ध ईरानी ड्रोन हमला हुआ है। इसके बावजूद, कीर स्टार्मर सरकार ने अमेरिका के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने का फैसला किया है, जो दर्शाता है कि पश्चिमी देश अब इस युद्ध को तार्किक परिणति तक पहुँचाने के मूड में हैं।
क्या यह 'अंतिम प्रहार' की तैयारी है?
रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि B-2 बॉम्बर्स की यह अग्रिम तैनाती (Forward Deployment) संकेत है कि राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के परमाणु ढांचे और बैलिस्टिक मिसाइल उत्पादन केंद्रों को पूरी तरह जमींदोज करना चाहते हैं। एडिरल ब्रॉड कूपर ने दावा किया है कि ईरान की मिसाइल हमला करने की क्षमता पहले ही 90% तक कम हो चुकी है। अब इन बॉम्बर्स के जरिए उन 'अंतिम ठिकानों' को खत्म करने की योजना है, जहां ईरान ने अपने सबसे घातक हथियार छिपा रखे हैं।




