Prabhat Vaibhav,Digital Desk : ईरान के साथ जारी भीषण युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी भावी रणनीति और युद्ध के उद्देश्यों को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका का लक्ष्य ईरान में 'सत्ता परिवर्तन' (Regime Change) या वहां 'लोकतंत्र' की स्थापना करना नहीं है। ट्रंप के मुताबिक, उनका एकमात्र उद्देश्य ईरान की उस नेतृत्व क्षमता को 'न्यूट्रलाइज' (बेअसर) करना है, जो अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए खतरा बनी हुई है। इस बयान ने मध्य पूर्व की जंग को एक नया और अधिक आक्रामक मोड़ दे दिया है।
"ईरान कैसे चलता है, यह हमारा काम नहीं": ट्रंप की बदली रणनीति
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति को दोहराया। उन्होंने कहा, "ईरान के लोग अपना देश कैसे चलाते हैं या वहां कौन सा शासन है, इससे मुझे कोई सरोकार नहीं है। मुझे केवल इस बात की चिंता है कि वहां से कोई भी मिसाइल या ड्रोन हमारे जहाजों या इजरायल की ओर न आए।" ट्रंप का यह बयान उन पूर्ववर्ती अमेरिकी प्रशासकों की नीतियों से बिल्कुल अलग है, जो अक्सर दूसरे देशों में लोकतंत्र की स्थापना के नाम पर युद्ध छेड़ते थे। ट्रंप ने साफ किया कि वह ईरान की सैन्य और परमाणु शक्ति को कुचलने तक ही सीमित रहेंगे।
नेतृत्व को 'न्यूट्रलाइज' करने का क्या है मतलब?
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के 'न्यूट्रलाइज' शब्द के पीछे एक गहरी और घातक रणनीति छिपी है। इसका सीधा अर्थ है—ईरान की कमांड एंड कंट्रोल चेन को पूरी तरह ध्वस्त करना। हाल ही में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई और शीर्ष सैन्य कमांडरों पर हुए हमलों (Operation Epic Fury) के बाद यह स्पष्ट है कि अमेरिका अब सीधे नेतृत्व को निशाना बना रहा है। ट्रंप का मानना है कि यदि नेतृत्व ही नहीं रहेगा, तो ईरान की 'प्रॉक्सि' सेनाएं (हिजबुल्लाह, हूतिया) अपने आप बिखर जाएंगी।
'लोकतंत्र' के बजाय 'डील्स' पर भरोसा
ट्रंप ने संकेत दिया है कि वह ईरान को एक 'सामान्य देश' की तरह देखना चाहते हैं जो आतंकवाद का समर्थन न करे। उन्होंने कहा कि एक बार जब ईरान की सैन्य क्षमता समाप्त हो जाएगी, तो वह एक 'मजबूत और महान' देश बन सकता है, बशर्ते वह अमेरिका की शर्तों पर समझौता करे। ट्रंप की यह नीति 'मैक्सिमम प्रेशर' (Maximum Pressure) का दूसरा चरण मानी जा रही है, जहां कूटनीति का रास्ता केवल तभी खुलता है जब दुश्मन पूरी तरह रक्षात्मक मुद्रा में आ जाए।
वैश्विक प्रतिक्रिया और ईरान की स्थिति
ट्रंप के इस बयान पर ईरान के विदेश मंत्रालय ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे 'गुंडागर्दी' करार दिया है। वहीं, यूरोपीय सहयोगियों के बीच ट्रंप की इस 'नॉन-डेमोक्रेटिक' एप्रोच को लेकर संशय बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप ईरान को पूरी तरह बर्बाद करने के बजाय उसे केवल इतना कमजोर करना चाहते हैं कि वह दोबारा सिर न उठा सके। इस बीच, खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर है और अमेरिकी नौसेना ने ईरान के तटों की घेराबंदी और कड़ी कर दी है।




