Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीदें एक बार फिर धूमिल होती नजर आ रही हैं। ईरान के शक्तिशाली रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास आने वाले किसी भी विदेशी सैन्य पोत को अमेरिका के साथ चल रहे दो सप्ताह के युद्धविराम का सीधा उल्लंघन माना जाएगा। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि ऐसी किसी भी हिमाकत का "कठोर और निर्णायक जवाब" दिया जाएगा।
समुद्री सीमा पर 'स्मार्ट मैनेजमेंट' और पूर्ण नियंत्रण
ईरानी सेना के सरकारी मीडिया द्वारा जारी बयान के अनुसार, रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य फिलहाल ईरानी नौसेना के पूर्ण नियंत्रण में है। ईरान ने इसे अपनी 'स्मार्ट मैनेजमेंट' प्रणाली का हिस्सा बताया है, जिसके तहत इस मार्ग से गुजरने वाले हर जहाज की निगरानी की जा रही है।
व्यापारिक जहाजों को छूट: ईरान ने कहा है कि गैर-सैन्य और वाणिज्यिक जहाजों के लिए रास्ता खुला रहेगा, बशर्ते वे निर्धारित नियमों का पालन करें।
सैन्य जहाजों पर पाबंदी: किसी भी देश के युद्धपोत या सैन्य बेड़े का इस क्षेत्र में आना सीधे तौर पर युद्ध को निमंत्रण देने जैसा होगा।
ट्रंप का जवाबी हमला: 'अब अमेरिकी नौसेना रोकेगी हर जहाज'
इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता के विफल होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तनाव को और बढ़ा दिया है। ट्रंप ने घोषणा की है कि अब अमेरिकी नौसेना होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी जहाजों को रोकना शुरू करेगी। ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान जलमार्ग को सुरक्षित रखने के अपने वादे से मुकर गया है और समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों (Sea Mines) के कारण अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी खतरे में है।
वार्ता विफल होने का परिणाम
यह ताजा विवाद पाकिस्तान की मध्यस्थता में चल रही इस्लामाबाद वार्ता के बेनतीजा खत्म होने का नतीजा है। अमेरिका का दावा है कि ईरान 'अवैध टोल' वसूल रहा है और चीनी युआन में व्यापार कर डॉलर के प्रभुत्व को चुनौती दे रही है। वहीं, ईरान अपनी संप्रभुता और समुद्री सीमाओं की रक्षा के नाम पर पीछे हटने को तैयार नहीं है।
तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार पर संकट
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की तेल आपूर्ति का मुख्य केंद्र है। अगर ईरान युद्धविराम तोड़ता है या अमेरिका नाकाबंदी को और कड़ा करता है, तो दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में जबरदस्त उछाल आ सकता है। दोनों देशों के अड़ियल रुख ने खाड़ी क्षेत्र को बारूद के ढेर पर खड़ा कर दिया है।




