Prabhat Vaibhav, Digital Desk : महिला आरक्षण विधेयक 2026 को लेकर देश की सियासत में उबाल आ गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में विपक्ष, खासकर कांग्रेस और 'INDIA' गठबंधन पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि ये दल महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों के रास्ते में रोड़ा अटका रहे हैं। शाह ने दो टूक कहा कि यदि विपक्ष के विरोध के कारण यह विधेयक गिरता है, तो देश की महिलाएं आगामी चुनावों में इसका करारा जवाब देंगी।
'INDIA' गठबंधन पर तुष्टीकरण और उत्तर-दक्षिण की राजनीति का आरोप
गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में चर्चा के दौरान कहा कि विपक्षी गठबंधन के सदस्यों ने इस संशोधन का स्वागत करने का दिखावा तो किया, लेकिन असल में इसका स्पष्ट विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "विपक्ष अब उत्तर और दक्षिण की राजनीति कर रहा है। मेरा मानना है कि अगर ये लोग वोट नहीं देंगे तो विधेयक गिर सकता है, लेकिन देश की माताएं और बहनें देख रही हैं कि उनके हक के बीच में कौन खड़ा है। आप हंगामे से सदन में तो बच सकते हैं, लेकिन चुनावी मैदान में मातृत्व की शक्ति जब हिसाब मांगेगी, तब भागने का रास्ता नहीं मिलेगा।"
2029 से पहले आरक्षण लागू करने की प्रतिबद्धता: शाह का पलटवार
विपक्ष द्वारा आरक्षण लागू करने की समयसीमा पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए अमित शाह ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की साजिश है कि महिलाओं के लिए आरक्षण 2029 से पहले लागू न हो पाए। शाह ने स्पष्ट किया, "हम विपक्ष की इस साजिश को सफल नहीं होने देंगे। हमारा लक्ष्य है कि महिलाओं को उनका अधिकार जल्द से जल्द मिले और राज्यों पर इसका समान भार हो।"
धर्म के आधार पर आरक्षण: संविधान की नीतियों पर दो टूक
मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण की मांग पर गृह मंत्री ने संवैधानिक स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता है। शाह ने सवाल किया, "INDIA गठबंधन के लोग केवल तुष्टीकरण की राजनीति के लिए ऐसी मांगें कर रहे हैं। कोई मुझे बताए कि संविधान के किस अनुच्छेद में धर्म आधारित आरक्षण का प्रावधान है? ये लोग संविधान की बात तो करते हैं लेकिन उसकी मूल भावना के खिलाफ काम करना चाहते हैं।"
ओबीसी के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा: 'यह केवल पाखंडी प्रेम है'
अमित शाह ने कांग्रेस के पिछड़े वर्ग (OBC) प्रेम को 'पाखंड' करार दिया। उन्होंने कहा, "1947 से 2014 तक कांग्रेस ने लगातार ओबीसी हितों का विरोध किया। आज जब उन्हें लगा कि बिना ओबीसी के सत्ता नहीं मिल सकती, तो वे उनकी प्रशंसा करने लगे हैं। देश का पिछड़ा वर्ग और महिलाएं जान चुकी हैं कि उनके अधिकार किसने छीने हैं। सिर्फ नारे लगाने से आप उनके शुभचिंतक नहीं बन जाएंगे।"
शाह के इस आक्रामक तेवर ने साफ कर दिया है कि 2026 का महिला आरक्षण विधेयक आने वाले चुनावों में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनने जा रहा है।




