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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पश्चिम बंगाल की राजनीति में 'खेला' शुरू होने से पहले ही चुनावी बिसात बिछ चुकी है। साल 2026 के विधानसभा चुनावों को लेकर जनता के मन में क्या चल रहा है, इसका एक बड़ा संकेत हालिया मैट्रिज़ (Matrize) जनमत सर्वेक्षण में मिला है। आंकड़ों की मानें तो बंगाल में मुकाबला इतना कड़ा है कि किसी भी पार्टी के लिए सत्ता की राह आसान नहीं दिख रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) और मुख्य विपक्षी दल भाजपा के बीच कांटे की टक्कर ने राज्य का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।

वोट शेयर का गणित: टीएमसी और भाजपा में महज 2% का अंतर

मैट्रिज़ सर्वे के अनुसार, इस बार पश्चिम बंगाल में सीधा और कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है। सर्वे के आंकड़ों पर नजर डालें तो सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस को 43% वोट मिलने का अनुमान है, जबकि भारतीय जनता पार्टी 41% वोट शेयर के साथ उनके बिल्कुल करीब खड़ी है। दोनों प्रमुख दलों के बीच महज 2% का यह फासला कई सीटों पर बड़ा उलटफेर कर सकता है। बंगाल की राजनीति को समझने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि यह 2% का अंतर ही तय करेगा कि सत्ता की चाबी किसके पास जाएगी।

16% 'अन्य' का सस्पेंस: क्या बिगाड़ेंगे जीत का समीकरण?

इस चुनावी सर्वे में सबसे चौंकाने वाला और महत्वपूर्ण आंकड़ा 'अन्य' दलों का है। कांग्रेस, वामपंथी दल और असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम (AIMIM) सहित अन्य निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में 16% वोट शेयर जाने का अनुमान है। यही वह 16% हिस्सा है जो बंगाल चुनाव का सबसे बड़ा 'एक्स फैक्टर' साबित होने वाला है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि ये 16% वोट किसी एक तरफ झुकते हैं, तो परिणाम एकतरफा हो सकता है, लेकिन यदि इनमें बिखराव हुआ, तो मुकाबला अंतिम राउंड तक सस्पेंस से भरा रहेगा।

मुस्लिम बहुल सीटों पर ओवैसी और कबीर का गठबंधन बढ़ाएगा तनाव

टीएमसी के लिए इस बार सबसे बड़ी चुनौती मुस्लिम बहुल इलाकों में दिख रही है। एआईएमआईएम ने हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नाव पार्टी (AJUP) के साथ हाथ मिलाकर चुनावी मैदान में ताल ठोक दी है। माना जा रहा है कि यह गठबंधन पारंपरिक रूप से टीएमसी के पाले में जाने वाले वोटों में सेंध लगा सकता है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने भी ध्रुवीकरण और वोटों के बंटवारे को लेकर चिंता जताई है। अगर 'अन्य' के खाते का 16% वोट शेयर टीएमसी के आधार को चोट पहुँचाता है, तो भाजपा को इसका सीधा फायदा मिल सकता है।

सीटों का अनुमान: बहुमत के करीब कौन?

सर्वेक्षण ने न केवल वोट प्रतिशत बल्कि सीटों के संभावित आंकड़ों से भी सबको चौंका दिया है। अनुमानों के मुताबिक:

तृणमूल कांग्रेस (TMC): 140 से 160 सीटें

भारतीय जनता पार्टी (BJP): 130 से 150 सीटें

अन्य: 8 से 16 सीटें

ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि बंगाल विधानसभा की 294 सीटों में से बहुमत का जादुई आंकड़ा पार करने के लिए दोनों दलों को कड़ी मशक्कत करनी होगी। टीएमसी को मामूली बढ़त तो मिल रही है, लेकिन भाजपा की चुनौती इतनी मजबूत है कि मामूली सा स्विंग भी बंगाल की सत्ता का चेहरा बदल सकता है।

बूथ लेवल पर छिड़ी जंग और 2026 की तैयारी

जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, दोनों ही पार्टियों ने अपनी जमीनी रणनीतियों को धार देना शुरू कर दिया है। 2% के इस सूक्ष्म अंतर को पाटने के लिए भाजपा और टीएमसी दोनों ही बूथ मैनेजमेंट और माइक्रो-लेवल प्लानिंग पर ध्यान दे रही हैं। स्थानीय मुद्दों से लेकर क्षेत्रीय अस्मिता तक, हर मोर्चे पर घेराबंदी की जा रही है। बंगाल की जनता का मिजाज फिलहाल 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में है, लेकिन एक बात तय है कि 2026 का यह चुनाव भारतीय राजनीति के सबसे रोमांचक मुकाबलों में से एक होने जा रहा है।