Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तराखंड की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी कैबिनेट का विस्तार करते हुए टीम को नई ऊर्जा और मजबूती दी है। राजभवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में राज्यपाल ने पांच नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए अनुभवी विधायक खजान दास और संगठन में मजबूत पकड़ रखने वाले भरत सिंह चौधरी सहित पांच दिग्गजों ने कैबिनेट मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली है। इस विस्तार को आगामी चुनावों और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की दिशा में धामी सरकार का मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।
राजभवन में शपथ ग्रहण और सियासी समीकरण
शुक्रवार को देहरादून स्थित राजभवन का दृश्य पूरी तरह बदला हुआ था। जैसे ही मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट तेज हुई, भाजपा कार्यकर्ताओं का हुजूम जुटना शुरू हो गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मौजूदगी में खजान दास, भरत सिंह चौधरी और अन्य तीन विधायकों ने बारी-बारी से शपथ ली। सूत्रों के मुताबिक, इस कैबिनेट विस्तार में कुमाऊं और गढ़वाल के बीच संतुलन बनाने की पूरी कोशिश की गई है। खजान दास को शामिल कर जहां दलित समीकरणों को साधा गया है, वहीं भरत सिंह चौधरी की एंट्री से शिक्षा और विकास के विजन को नई गति मिलने की उम्मीद है।
धामी की नई टीम में अनुभव और युवा जोश का संगम
मुख्यमंत्री धामी ने अपनी इस नई टीम के चयन में अनुभव को वरीयता दी है। खजान दास जो कि राजपुर रोड से विधायक हैं, उनकी प्रशासनिक पकड़ काफी मजबूत मानी जाती है। वहीं रुद्रप्रयाग से विधायक भरत सिंह चौधरी अपने क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए जाने जाते हैं। इनके अलावा शामिल किए गए अन्य तीन मंत्रियों के नामों ने भी राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया है। मंत्रिमंडल में खाली पड़े पदों को भरकर धामी सरकार ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि अब विकास कार्यों की फाइलें और तेजी से दौड़ेंगी। शपथ ग्रहण के बाद नए मंत्रियों के समर्थकों ने जमकर आतिशबाजी की और मिठाई बांटी।
विपक्ष की घेराबंदी और सरकार की नई चुनौतियां
कैबिनेट विस्तार के साथ ही मुख्यमंत्री धामी के सामने अब विभागों के बंटवारे की चुनौती होगी। जानकारों का कहना है कि नए मंत्रियों को महत्वपूर्ण विभाग सौंपकर सरकार जनता के बीच अपनी पैठ और मजबूत करना चाहती है। इधर, विपक्ष ने इस विस्तार पर चुटकी लेते हुए इसे केवल चुनावी स्टंट करार दिया है। हालांकि, भाजपा नेतृत्व का मानना है कि इन नए चेहरों के आने से सरकार की कार्यप्रणाली में और अधिक पारदर्शिता और गति आएगी। अब देखना यह होगा कि धामी की यह 'नई पंच शक्ति' उत्तराखंड के विकास मॉडल को कितनी ऊंचाई तक ले जाती है।
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