Prabhat Vaibhav, Digital Desk : मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी भारी तनाव के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान ने पिछले 49 दिनों से बंद पड़े दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को वाणिज्यिक जहाजों के लिए फिर से खोलने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने इस फैसले की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया है कि अब इस मार्ग से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही पर कोई रोक नहीं होगी।
लेबनान युद्धविराम का असर: शांति की शर्त पर खुला समुद्री रास्ता
ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक महत्वपूर्ण अपडेट साझा करते हुए बताया कि यह फैसला लेबनान में लागू हुए युद्धविराम के मद्देनजर लिया गया है। उन्होंने लिखा, "लेबनान में युद्धविराम के सम्मान में, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी वाणिज्यिक जहाजों के लिए समुद्री मार्ग को युद्धविराम की अवधि तक पूरी तरह से खोल दिया गया है।" इस घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
दुनिया के 20% तेल-गैस की 'लाइफलाइन' है यह रास्ता
होर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए गेम-चेंजर माना जा रहा है। दरअसल, दुनिया के कुल कच्चे तेल और गैस आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। पिछले डेढ़ महीने से अधिक समय से इस रास्ते के बंद होने के कारण वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई थी और तेल की कीमतों में उछाल का खतरा मंडरा रहा था। खाड़ी देशों से पेट्रोलियम उत्पादों को दुनिया के अन्य हिस्सों तक पहुँचाने के लिए यह मुख्य 'लाइफलाइन' है।
ईरान की सख्त शर्त: 'कोऑर्डिनेटेड रूट' का करना होगा पालन
भले ही ईरान ने रास्ता खोल दिया हो, लेकिन सुरक्षा को लेकर एक कड़ी शर्त भी रखी गई है। विदेश मंत्री अराघची ने साफ किया है कि जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी जहाजों को 'ईरानी बंदरगाह और समुद्री संगठन' द्वारा निर्धारित और समन्वित मार्ग (Coordinated Route) का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा। इसका सीधा मतलब यह है कि इस मार्ग पर होने वाली हर गतिविधि और यातायात पर ईरान का पूर्ण नियंत्रण रहेगा, ताकि सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का यह कदम वैश्विक दबाव और अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर करने की एक कोशिश है। यदि लेबनान में युद्धविराम लंबे समय तक टिका रहता है, तो होर्मुज का यह मार्ग खुला रहेगा, जिससे भारत सहित कई एशियाई देशों को सस्ते तेल की निर्बाध आपूर्ति जारी रह सकेगी।




