Prabhat Vaibhav,Digital Desk : देवभूमि उत्तराखंड में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत एक ऐतिहासिक अध्याय लिखा गया है। राज्य में शरणार्थी के रूप में रह रहे 153 हिंदू परिवारों के लिए सोमवार का दिन नई खुशियां लेकर आया। वर्षों तक अपनी पहचान के लिए संघर्ष करने के बाद, अब इन्हें आधिकारिक तौर पर भारतीय नागरिकता प्रदान कर दी गई है। इनमें पाकिस्तान से आए 147 और अफगानिस्तान से आए 6 शरणार्थी शामिल हैं, जो अब गर्व के साथ खुद को भारतीय कह सकेंगे।
जांच प्रक्रिया पूरी, गृह मंत्रालय ने दी हरी झंडी
केंद्रीय गृह मंत्रालय और उत्तराखंड गृह विभाग ने सीएए के कड़े प्रावधानों के तहत इन आवेदकों की गहन जांच-पड़ताल की। पात्रता सुनिश्चित होने के बाद देहरादून चैप्टर के माध्यम से इनका पंजीकरण पूर्ण किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि इस कानून ने वर्षों से उपेक्षित परिवारों को न केवल अधिकार, बल्कि सम्मान के साथ जीने की नई राह दी है।
कहां से आए हैं ये नए नागरिक?
नागरिकता पाने वाले अधिकांश लोग पाकिस्तान के सिंध और बलूचिस्तान प्रांतों से धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए थे। उत्तराखंड में ये परिवार मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों में बसे हुए हैं:
देहरादून और ऋषिकेश
हरिद्वार
उधम सिंह नगर
इन जिलों में रहने वाले इन शरणार्थियों के पास अब भारत का अपना पासपोर्ट और मतदान का अधिकार होगा।
अभी भी 45 आवेदन कतार में
आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड से कुल 198 व्यक्तियों ने नागरिकता के लिए आवेदन किया था। 153 आवेदनों के स्वीकृत होने के बाद अब 45 आवेदन केंद्र सरकार के पास लंबित हैं। इनमें पाकिस्तान से आए 42 और बांग्लादेश से आए 3 शरणार्थी शामिल हैं, जिनकी जांच प्रक्रिया अंतिम चरणों में है।
अमित शाह करेंगे नव-नागरिकों का सम्मान
7 मार्च का दिन इन परिवारों के लिए बेहद खास होने वाला है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हरिद्वार के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान एक भव्य कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी है, जहां गृह मंत्री खुद इन नव-नागरिकों को नागरिकता प्रमाण पत्र सौंप सकते हैं या उनका सम्मान करेंगे। प्रशासन ने सभी संबंधित नागरिकों से संपर्क कर उन्हें इस गौरवशाली पल का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया है।
क्या है CAA 2019?
केंद्र सरकार ने 2019 में नागरिकता अधिनियम 1955 में संशोधन किया था। इसके तहत 31 दिसंबर 2014 से पहले पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से भारत आए प्रताड़ित अल्पसंख्यकों (हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई) को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है।




