Prabhat Vaibhav,Digital Desk : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को मथुरा से लौटने के बाद उच्चस्तरीय बैठक में प्रदेश की प्रमुख इन्फ्रास्ट्रक्चर, सिंचाई, ऊर्जा, शिक्षा और औद्योगिक परियोजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि मेगा प्रोजेक्ट्स प्रदेश को आर्थिक समृद्धि और निवेश का केंद्र बना रहे हैं, इसलिए इन्हें समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
गंगा एक्सप्रेसवे फरवरी अंत तक तैयार
594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इसे फरवरी के अंत तक पूरा किया जाए। यह परियोजना 12 जिलों और 500 से अधिक गांवों को सीधा लाभ पहुंचाएगी और औद्योगिक, कृषि तथा लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को नई गति देगी। सड़क की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीकी मानकों के आधार पर परीक्षण किए जा रहे हैं।
जेवर एयरपोर्ट फेज-3 में तेजी
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने फेज-3 के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए। इसके शुभारंभ से प्रदेश एयर कार्गो हब के रूप में उभरेगा और निवेश तथा रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्रियल हब को मिलेगी गति
ग्रेटर नोएडा में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब और ट्रांसपोर्ट हब निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। इससे उद्योगों की लागत घटेगी और सप्लाई-चेन मजबूत होगी।
सिंचाई और ऊर्जा परियोजनाओं की समीक्षा
मध्य गंगा नहर (स्टेज-2), एरच सिंचाई परियोजना और रिहंद-ओबरा विद्युत परियोजनाओं का भी निरीक्षण किया गया। मध्य गंगा नहर परियोजना से अमरोहा, मुरादाबाद और संभल के बड़े कृषि क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा का विस्तार होगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। एरच परियोजना बुंदेलखंड क्षेत्र में जल संरक्षण और पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करेगी। रिहंद-ओबरा पंप स्टोरेज परियोजनाएं भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने और नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर उपयोग में सहायक होंगी।
शिक्षा और रेल परियोजनाओं पर जोर
माडल कंपोजिट स्कूल योजना के तहत 75 जिलों में 150 माडल स्कूलों की स्थापना में अनावश्यक देरी न करने के निर्देश दिए गए। दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और बहराइच-श्रावस्ती-बलरामपुर-सिद्धार्थनगर नई रेल लाइन परियोजना में भूमि उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश जिलाधिकारियों को दिए गए, ताकि सीमावर्ती और आकांक्षात्मक जिलों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिल सके।




