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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तर प्रदेश में निर्माणाधीन बड़ी विकास परियोजनाओं को समय पर पूरा करने और उनके रास्ते में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए योगी सरकार ने एक हाई-टेक कदम उठाया है। केंद्र सरकार के 'प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप' (PMG) पोर्टल की तर्ज पर अब उत्तर प्रदेश में 'स्टेट PMG पोर्टल' की शुरुआत की गई है।

मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने इस संबंध में सभी विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इस नई व्यवस्था से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि अफसरों की जवाबदेही भी तय होगी।

क्या है स्टेट PMG पोर्टल और कैसे करेगा काम?

यह पोर्टल एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो विभिन्न सरकारी विभागों और निर्माण एजेंसियों के बीच पुल का काम करेगा।

त्वरित समाधान: यदि किसी सड़क, पुल या बिल्डिंग के निर्माण में वन विभाग की एनओसी, जमीन अधिग्रहण या किसी अन्य विभाग की वजह से देरी हो रही है, तो उसे इस पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा।

धार्मिक स्थलों से जुड़ी बाधाएं: खास बात यह है कि इस पोर्टल में उन परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी जो धार्मिक स्थलों या संवेदी मुद्दों के कारण अटकी हुई हैं।

मल्टी-स्टेकहोल्डर कोऑर्डिनेशन: पोर्टल के जरिए समस्याओं को सीधे संबंधित जिले, विभाग या केंद्र सरकार के मंत्रालयों तक भेजा जा सकेगा।

10 करोड़ से अधिक की परियोजनाएं होंगी रडार पर

नियोजन विभाग के अनुसार, इस पोर्टल की निगरानी का दायरा काफी बड़ा रखा गया है:

CMIS पोर्टल से लिंक: मुख्यमंत्री सूचना प्रणाली (CMIS) पोर्टल पर दर्ज 10 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली सभी परियोजनाओं को 'स्टेट PMG पोर्टल' से API के माध्यम से स्वतः जोड़ दिया गया है।

41 विभाग शामिल: प्रदेश के 41 महत्वपूर्ण विभागों और उनकी कार्यदायी संस्थाओं को इस व्यवस्था से जोड़ा गया है।

मुख्य सचिव के निर्देश: "समयबद्ध निस्तारण जरूरी"

मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया है कि पोर्टल पर दर्ज समस्याओं के समाधान के लिए अब नियमित अंतराल पर समीक्षा बैठकें होंगी।

जवाबदेही: यदि कोई प्रोजेक्ट लंबित रहता है, तो संबंधित विभाग को पोर्टल पर देरी का ठोस कारण और समाधान की समय-सीमा बतानी होगी।

पारदर्शिता: इस पोर्टल के जरिए शासन स्तर पर बैठे अधिकारी एक क्लिक में जान सकेंगे कि किस जिले में कौन सा बड़ा प्रोजेक्ट किस वजह से रुका है।

नई व्यवस्था से होने वाले फायदे

लागत में कमी: प्रोजेक्ट समय पर पूरे होंगे तो उनकी निर्माण लागत (Cost Overrun) नहीं बढ़ेगी।

बेहतर समन्वय: विभागों के बीच होने वाली 'कागजी लेटलतीफी' खत्म होगी।

विकास को गति: एक्सप्रेसवे, मेट्रो, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और धार्मिक पर्यटन से जुड़ी परियोजनाओं के पूरा होने का रास्ता साफ होगा।