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Prabhat Vaibhav, Digital Desk : चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक ऐसी क्रांतिकारी सफलता हाथ लगी है, जो कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के खिलाफ जंग में गेम-चेंजर साबित हो सकती है। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, लॉस एंजिल्स (UCLA) के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा अनूठा रक्त परीक्षण विकसित किया है, जो शरीर में कैंसर के पनपने से पहले ही उसके संकेतों को पकड़ सकता है। 'मिथाइलस्कैन' (MethylScan) नाम की इस तकनीक से अब केवल एक बूंद खून के नमूने के जरिए शरीर के समग्र स्वास्थ्य का सटीक आकलन किया जा सकेगा।

क्या है 'मिथाइलस्कैन' तकनीक और यह कैसे काम करती है?

अक्सर कैंसर का पता तब चलता है जब वह शरीर में फैल चुका होता है, लेकिन 'मिथाइलस्कैन' इस चुनौती को जड़ से खत्म करने की क्षमता रखती है। यह परीक्षण रक्त में मौजूद डीएनए (DNA) के सूक्ष्म टुकड़ों का विश्लेषण करता है। जब शरीर की कोशिकाएं नष्ट होती हैं, तो वे अपना डीएनए रक्त प्रवाह में छोड़ देती हैं। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह डीएनए में मौजूद 'मिथाइलेशन पैटर्न' को पढ़ती है। ये रासायनिक मार्कर एक तरह के 'बायोलॉजिकल सिग्नेचर' होते हैं, जो स्वस्थ और बीमार कोशिकाओं के बीच फर्क को स्पष्ट कर देते हैं।

लिवर कैंसर की पहचान में 80% सटीकता, 'बैकग्राउंड नॉइज़' की समस्या भी हल

ब्लड आधारित टेस्ट में सबसे बड़ी बाधा 'बैकग्राउंड नॉइज़' होती है, यानी रक्त में मौजूद सामान्य कोशिकाओं का भारी मात्रा में डीएनए, जो बीमारी के लक्षणों को छिपा देता है। शोधकर्ताओं ने इस बाधा को पार करने के लिए एक विशेष फिल्टरिंग तकनीक अपनाई है, जो अनावश्यक डीएनए को हटाकर केवल जानकारीपूर्ण डेटा पर ध्यान केंद्रित करती है। 1,000 से अधिक लोगों पर किए गए इस अध्ययन के परिणाम चौंकाने वाले रहे हैं। शुरुआती चरण के आधे से अधिक कैंसर मामलों की पहचान इस टेस्ट से संभव हुई है। विशेष रूप से लिवर कैंसर के हाई-रिस्क मामलों में इसकी सफलता दर 80 प्रतिशत तक देखी गई है।

अंग विशेष की पहचान: डॉक्टर जान सकेंगे कहां है गड़बड़

मिथाइलस्कैन परीक्षण की एक और क्रांतिकारी खूबी यह है कि यह न केवल कैंसर की मौजूदगी बताता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि शरीर का कौन सा विशिष्ट अंग (जैसे लिवर, फेफड़े या कोलन) प्रभावित है। प्रतिष्ठित पत्रिका 'प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज' (PNAS) में प्रकाशित इस शोध के अनुसार, उन्नत कंप्यूटर एल्गोरिदम के जरिए डेटा का विश्लेषण किया जाता है, जिससे डॉक्टरों को यह पता लगाने में आसानी होती है कि आगे की जांच किस दिशा में करनी है।

भविष्य की राह: सस्ता और सुलभ होगा कैंसर का इलाज

वर्तमान में कैंसर की जांच के लिए महंगे और असुविधाजनक बायोप्सी या स्कैन की जरूरत होती है, लेकिन यह नई तकनीक भविष्य में इसे बेहद सस्ता और सुलभ बना सकती है। हालांकि, शोधकर्ताओं का कहना है कि यह तकनीक अभी शुरुआती दौर में है और इसे सामान्य जनता के उपयोग के लिए उपलब्ध कराने से पहले अभी और बड़े पैमाने पर क्लीनिकल ट्रायल्स की आवश्यकता होगी। यदि यह तकनीक सफल रहती है, तो कैंसर जैसी घातक बीमारी का इलाज 'होने से पहले' ही संभव हो सकेगा।