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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) में की गई कटौती पर सख्त रुख अपनाते हुए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने प्रशासन के उस आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया है, जिसके तहत महंगाई भत्ते को 189 प्रतिशत से घटाकर 164 प्रतिशत कर दिया गया था। जस्टिस जगमोहन बंसल की पीठ ने स्पष्ट आदेश दिया है कि 'समग्र शिक्षा परियोजना' (SSP) के तहत कार्यरत संसाधन व्यक्तियों का 189% डीए बहाल किया जाए और उन्हें पिछला सारा बकाया (Arrears) भी दिया जाए।

1 जुलाई 2021 से लागू होगा लाभ, बजट की कमी का बहाना नहीं चलेगा

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि महंगाई भत्ते में यह बहाली 1 जुलाई 2021 से प्रभावी मानी जाएगी। मामले की सुनवाई के दौरान चंडीगढ़ प्रशासन ने दलील दी थी कि बजट की कमी के कारण डीए में कटौती करनी पड़ी और भुगतान की गई अतिरिक्त राशि की वसूली शुरू की गई। अदालत ने इस तर्क को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि दो सरकारी विभागों (केंद्र और प्रशासन) के बीच बजट संबंधी खींचतान का खामियाजा उन कर्मचारियों को नहीं भुगतना चाहिए, जो अपनी सेवाएं पूरी निष्ठा से दे रहे हैं।

तीन महीने की डेडलाइन: देरी हुई तो देना होगा 9% ब्याज

अदालत ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए प्रशासन को भुगतान के लिए सख्त समयसीमा (Deadline) तय की है:

भुगतान की अवधि: सभी पात्र कर्मचारियों को बकाया राशि का भुगतान तीन महीने के भीतर करना होगा।

ब्याज का प्रावधान: यदि प्रशासन निर्धारित तीन महीनों में भुगतान करने में विफल रहता है, तो उसे बकाया राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

संसाधन व्यक्तियों (Resource Persons) को मिली बड़ी जीत

यह मामला विक्रम सिंह व अन्य द्वारा दायर याचिकाओं पर आया था। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि उनका चयन 2019-20 में समग्र शिक्षा परियोजना के तहत हुआ था और वे अन्य संविदा शिक्षकों (Contractual Teachers) के समान ही कार्य कर रहे हैं। जब अन्य शिक्षकों को बढ़ा हुआ डीए मिल रहा है, तो उनके साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता अन्य शिक्षकों के समान हैं और उन्हें 'समान दर' से डीए पाने का संवैधानिक अधिकार है।

प्रशासन की वसूली प्रक्रिया पर भी लगी रोक

रिकॉर्ड के अनुसार, चंडीगढ़ प्रशासन ने पहले केंद्र सरकार से अतिरिक्त राशि की मांग की थी, लेकिन बजट स्वीकृत होने के बावजूद इसे घटा दिया गया था। प्रशासन ने कर्मचारियों से अंतर की राशि वसूलना भी शुरू कर दिया था, जिसे अब हाईकोर्ट ने अवैध ठहराते हुए रोक दिया है। इस फैसले से चंडीगढ़ में कार्यरत सैकड़ों शिक्षा कर्मियों ने राहत की सांस ली है।