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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : मध्य पूर्व (Middle East) एक बार फिर बारूद के ढेर पर खड़ा नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अब बेहद खतरनाक मोड़ ले लिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चारों ओर से घेरने के लिए पिछले 24 घंटों में अपनी सैन्य शक्ति का अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन किया है। जिनेवा में चल रही हाई-लेवल परमाणु वार्ता के बीच अमेरिका की इस भारी सैन्य तैनाती ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बातचीत का यह आखिरी दौर विफल रहा, तो मध्य पूर्व में एक ऐसा विनाशकारी युद्ध छिड़ सकता है जिसकी कल्पना भी डराने वाली है।

ट्रंप की 'वार' तैयारी: 150 मालवाहक विमान और स्टैंडबाय पर लड़ाकू बेड़ा

अमेरिकी न्यूज पोर्टल 'एक्सियोस' की रिपोर्ट ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है। खुफिया सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ एक गुप्त और भयावह सैन्य ऑपरेशन की योजना बना रहा है। पिछले कुछ घंटों के भीतर अमेरिका ने अभूतपूर्व सैन्य जमावड़ा किया है:

150 से अधिक बड़े सैन्य मालवाहक विमान: इन विमानों ने मध्य पूर्व में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर आधुनिक मिसाइलें, गोला-बारूद और एडवांस डिफेंस सिस्टम पहुंचाए हैं।

50 से ज्यादा घातक लड़ाकू विमान: अमेरिका ने अपने सबसे विनाशकारी लड़ाकू विमानों— F-35, F-22 और F-16 को सीधे ईरान की सीमा के नजदीक तैनात कर दिया है। ये सभी विमान इस समय 'स्टैंडबाय मोड' पर हैं, यानी बस एक आदेश मिलते ही हमला शुरू कर देंगे।

जिनेवा वार्ता: शांति का आखिरी मौका या युद्ध का बहाना?

एक तरफ अमेरिका ने युद्ध की तैयारी पूरी कर ली है, तो दूसरी तरफ स्विट्जरलैंड के जिनेवा में कूटनीति का आखिरी खेल चल रहा है। ट्रंप के भरोसेमंद सलाहकार जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ करीब तीन घंटे लंबी गुप्त बैठक की। हालांकि सूत्रों का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच मतभेद इतने गहरे हैं कि समझौते की गुंजाइश न के बराबर दिख रही है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने भी कड़े लहजे में साफ कर दिया है कि ट्रंप ने कुछ 'रेड लाइन' (कठोर शर्तें) तय कर दी हैं। अगर ईरान इन शर्तों पर नहीं झुकता, तो अमेरिका सैन्य एक्शन लेने से पीछे नहीं हटेगा।

अमेरिका-इजराइल का जॉइंट ऑपरेशन: 'ईरान पर हमले की 90% संभावना'

खबरें ये भी हैं कि इस बार अमेरिका अकेला नहीं है। अगर बातचीत नाकाम हुई, तो अमेरिका और इजराइल मिलकर ईरान के परमाणु ठिकानों और सरकारी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाएंगे। यह सैन्य अभियान हफ्तों तक चल सकता है, जिसका मकसद ईरान की सत्ता के वजूद को हिलाना होगा। सबसे चौंकाने वाला बयान राष्ट्रपति ट्रंप के एक करीबी सलाहकार ने दिया है। उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर दावा किया कि "अगले कुछ हफ्तों में ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य हमले की 90 प्रतिशत संभावना है।" अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी संकेत दिए हैं कि सेना को 'गो ग्रीन' सिग्नल मिलने का इंतजार है।

विश्व शांति के लिए बड़ा खतरा: गुप्त तरीके से लिया जा रहा फैसला

हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी सैन्य हलचल के बावजूद अमेरिकी कांग्रेस या वहां की आम जनता के बीच इस पर कोई सार्वजनिक चर्चा नहीं हो रही है। इससे संकेत मिलता है कि ट्रंप प्रशासन बेहद गुप्त तरीके से ईरान के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की तरफ बढ़ रहा है। यदि यह युद्ध छिड़ता है, तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा। दुनिया अब सांसें थामकर जिनेवा से आने वाली अगली खबर का इंतजार कर रही है।